नई दिल्ली। 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में कई ऐसे विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जो देश की राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं। लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक, महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े 129वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
परिसीमन विधेयक पर टिकी निगाहें
सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 निर्वाचित सीटों को बढ़ाकर करीब 850 करने और लंबे समय से लंबित परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। यह प्रक्रिया 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से जुड़ी होगी। यदि यह विधेयक आता है, तो देश के कई राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी होगी बहस
सरकार एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती है। इसके लिए 129वां संविधान संशोधन विधेयक लाए जाने की संभावना है। विपक्ष पहले ही इस प्रस्ताव को लेकर सवाल उठा चुका है, ऐसे में संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस होने के आसार हैं।
महिला आरक्षण लागू करने पर भी नजर
महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में भी सरकार महत्वपूर्ण पहल कर सकती है। यदि इस पर आगे बढ़ा जाता है, तो लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जाएगा।
संविधान संशोधन के लिए चाहिए विशेष बहुमत
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, इन विधेयकों को पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होगा। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना अनिवार्य है।
सरकार के सामने संख्या बल की चुनौती
हालांकि बजट सत्र की तुलना में एनडीए की स्थिति पहले से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक विशेष बहुमत जुटाना अभी भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति और विपक्ष का रुख दोनों पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।



