सीजी भास्कर 25 दिसम्बर Chief Minister Excellence Award 2025–26 : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 की घोषणा की। यह पहल उन जिलों और विभागों को सम्मानित करने के लिए शुरू की गई है, जिन्होंने ज़मीनी स्तर पर शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के लिए ठोस नवाचार किए हैं। यह पुरस्कार राज्य में उभर रही परिणाम-आधारित प्रशासनिक संस्कृति को रेखांकित करता है।
“सुशासन का मूल्यांकन परिणामों से होगा”
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन केवल योजनाओं की घोषणा या बजट खर्च तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका मूल्यांकन वास्तविक प्रभाव, नागरिकों को मिले लाभ और समाधान की स्थायित्व क्षमता से होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुरस्कार उस सोच को मजबूती देता है, जिसमें प्रशासन जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को निरंतर विकसित करता है।
सुशासन दिवस से जुड़ी प्रशासनिक पहल
परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर मनाए जा रहे सुशासन दिवस के परिप्रेक्ष्य में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार की घोषणा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी की शासन-दृष्टि से प्रेरित यह पहल जनहित को केंद्र में रखकर विकसित किए गए प्रशासनिक प्रयोगों को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का आधार बनेगी।
तकनीक, संवेदनशीलता और सुधार का संगम
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में शासन में नवाचार कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्रशासनिक दायित्व है। तकनीक के साथ मानवीय संवेदनशीलता और संस्थागत सुधारों का संतुलन ही आधुनिक लोक प्रशासन की पहचान है। जिन पहलों को सम्मानित किया जा रहा है, वे भविष्य के लिए दोहराए जा सकने वाले मॉडल हैं, न कि केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां।
बहु-स्तरीय चयन प्रणाली अपनाई गई
मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के लिए एक सुदृढ़ और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई। इस वर्ष कुल 312 नवाचार प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें 275 जिले स्तर से और 37 राज्य स्तरीय विभागों से आए। यह व्यापक सहभागिता इस बात का संकेत है कि प्रशासन के हर स्तर पर समाधान-केंद्रित सोच विकसित हो रही है।
समाधान-केंद्रित शासन की ओर कदम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह बढ़ती भागीदारी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि शासन संस्कृति में आ रहे सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है। समस्याओं को टालने के बजाय समाधान खोजने की प्रवृत्ति अब प्रशासन का हिस्सा बन रही है, जो छत्तीसगढ़ को सुशासन की दिशा में आगे ले जाएगी।


