सीजी भास्कर, 14 जून : खेती में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए केवल उन्नत बीज, खाद और सिंचाई (Crop Protection Management) पर्याप्त नहीं हैं। फसल को नुकसान पहुंचाने वाले खरपतवार, कीट और रोगों का समय पर नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआती अवस्था में इन समस्याओं की पहचान कर उचित प्रबंधन करें तो फसल उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। वहीं लापरवाही की स्थिति में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फसल के शुरुआती 30 दिन सबसे अहम
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फसल अंकुरण के बाद के पहले 20 से 30 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान खेतों में खरपतवार तेजी से विकसित होते हैं और फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्व, नमी, धूप तथा उर्वरकों का बड़ा हिस्सा अपने उपयोग में ले लेते हैं। इसका सीधा असर फसल की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ता है।
धान, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहन और तिलहन फसलों में इस अवधि के दौरान विशेष निगरानी और प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
सही पहचान के बाद ही करें नियंत्रण
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार की दवा या रसायन का उपयोग करने से पहले समस्या की सही पहचान करना जरूरी है। कीट प्रकोप होने पर पत्तियों में छेद, पीलापन, सिकुड़न या रस चूसने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं रोग लगने पर पत्तियों और तनों पर काले, भूरे या पीले धब्बे नजर आ सकते हैं।
खरपतवार मुख्य फसल के साथ उगने वाले अवांछित पौधे होते हैं, जो फसल की वृद्धि को प्रभावित करते हैं और उत्पादन घटा देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पहचान के दवाओं का उपयोग करने से आर्थिक नुकसान के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और लाभकारी कीटों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वैज्ञानिक तरीके अपनाने से बढ़ा उत्पादन
कोरबा जिले के करतला विकासखंड के किसान रोहित कुमार राठिया ने बताया कि वे मानसून से पहले मिश्रित फसलों के बीजों का उपयोग करते हैं और फसल उगने के लगभग एक माह बाद खेत की जुताई करते हैं। इससे खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार हुआ है।
उन्होंने बताया कि नियमित खरपतवार, कीट और रोग प्रबंधन अपनाने से उनकी फसल की पैदावार में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ आय में भी सुधार हुआ है।
कम लागत में अधिक उत्पादन का रास्ता
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खेती और समय पर फसल संरक्षण उपाय अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। नियमित निरीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कीट एवं रोग नियंत्रण किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।





