मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखा है। पत्र में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के कामकाज और बहुसदस्यीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, अभी यह केवल कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगने से जुड़ा मामला है और अदालत की ओर से कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
अटॉर्नी जनरल की अनुमति क्यों जरूरी
सुप्रीम कोर्ट में किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से पहले अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की लिखित सहमति आवश्यक होती है। इसी प्रक्रिया के तहत वकील ने अटॉर्नी जनरल को पत्र भेजकर कार्रवाई शुरू करने की अनुमति मांगी है। अब इस अनुरोध पर अटॉर्नी जनरल का रुख महत्वपूर्ण होगा।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
पत्र में हालिया मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्तों ने पिछले कुछ महीनों में कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण से जुड़े सॉफ्टवेयर में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने जैसे मामलों का उल्लेख किया गया है।
वकील के पत्र में आरोप लगाया गया है कि बहुसदस्यीय चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुरूप सभी आयुक्तों की भागीदारी और सहमति के बजाय फैसलों को एकतरफा तरीके से लिया गया। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया है।
अब अटॉर्नी जनरल के फैसले पर नजर
इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। वहीं, इस मामले में अभी किसी अदालत की ओर से कोई फैसला या आदेश सामने नहीं आया है।
अब आगे की स्थिति अटॉर्नी जनरल की अनुमति और उसके बाद होने वाली संभावित न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।



