सीजी भास्कर 16 जनवरी Dharmendra Tahalka Box Office: हिंदी सिनेमा में कई बार ऐसा हुआ है, जब उम्र सिर्फ एक नंबर साबित हुई। साल 1992 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब 57 साल के धर्मेंद्र ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया कि उनका स्टारडम अपने ही बेटे सनी देओल पर भारी पड़ गया। यह मुकाबला सिर्फ फिल्मों का नहीं, बल्कि अनुभव बनाम युवा जोश का था।
Dharmendra Tahalka Box Office: अनुभव की जीत
धर्मेंद्र उस दौर में ऐसे अभिनेता थे, जिनका नाम पोस्टर पर आते ही दर्शकों का भरोसा बन जाता था। ‘तहलका’ में उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि स्क्रीन प्रेजेंस उम्र का मोहताज नहीं होता। फिल्म में उनका रौब, एक्शन और संवाद अदायगी दर्शकों को सीट से बांधे रखने में कामयाब रही।
फिल्म ‘तहलका’ और उसका ज़बरदस्त असर
26 जून 1992 को रिलीज़ हुई ‘तहलका’ का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। फिल्म में अमरीश पुरी, नसीरुद्दीन शाह, आदित्य पंचोली और मुकेश खन्ना जैसे दमदार कलाकार मौजूद थे। मल्टी-स्टार कास्ट के बावजूद कहानी का केंद्र धर्मेंद्र ही रहे, और यही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी।
‘तहलका’ ने उस दौर में करीब 16.25 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह आंकड़ा आज भले छोटा लगे, लेकिन 90 के दशक में इसे ब्लॉकबस्टर माना गया। साल 1992 की टॉप कमाई करने वाली फिल्मों में यह चौथे नंबर पर रही, जिसने धर्मेंद्र की स्टार पावर को फिर से स्थापित कर दिया।
सनी देओल की ‘विश्वात्मा’ से सीधी टक्कर
दूसरी ओर, सनी देओल की फिल्म ‘विश्वात्मा’ पहले ही जनवरी 1992 में रिलीज़ हो चुकी थी। फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला और ‘सात समंदर’ गाना चार्टबस्टर बना। बावजूद इसके, कमाई के मामले में यह फिल्म ‘तहलका’ से पीछे रह गई।
विश्वात्मा की लोकप्रियता, लेकिन कम कलेक्शन
राजीव राय के निर्देशन में बनी ‘विश्वात्मा’ ने लगभग 9.5 करोड़ रुपये की कमाई की थी। फिल्म हिट जरूर रही, लेकिन बॉक्स ऑफिस रेस में यह छठे स्थान पर ही पहुंच सकी। यहीं से साफ हो गया कि 1992 में पिता-पुत्र की इस जंग में बाज़ी धर्मेंद्र के हाथ लगी।
पीढ़ियों के बीच की ऐतिहासिक भिड़ंत
यह मुकाबला सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं था। यह उस दौर की कहानी है, जब दर्शक स्टार के नाम पर सिनेमाघर पहुंचते थे। धर्मेंद्र ने साबित कर दिया कि अनुभव, सही स्क्रिप्ट और दमदार प्रस्तुति मिल जाए, तो उम्र और ट्रेंड दोनों पीछे छूट जाते हैं।
90 के दशक की यादगार बॉक्स ऑफिस कहानी
आज भी जब 90 के दशक की बड़ी बॉक्स ऑफिस टक्करों की बात होती है, तो ‘तहलका’ बनाम ‘विश्वात्मा’ का ज़िक्र जरूर आता है। यह वही दौर था, जब धर्मेंद्र ने दिखा दिया कि वो सिर्फ अतीत के सुपरस्टार नहीं, बल्कि हर दौर के चहेते अभिनेता हैं।


