सीजी भास्कर, 13 जून : खरीफ सीजन की शुरुआत के बीच डीजल संकट (Diesel Crisis) ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों की जुताई का महत्वपूर्ण समय होने के बावजूद डीजल की कमी के कारण कई ट्रैक्टर खड़े हैं और कृषि कार्यों की रफ्तार थम गई है। जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सीमित आपूर्ति के चलते लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
डीजल के लिए पंप-पंप भटक रहे किसान
ग्रामीण क्षेत्रों के किसान सुबह से ही डीजल की तलाश में निकल रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि उन्हें एक पंप से दूसरे पंप तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है। सीमित आपूर्ति और नियंत्रित वितरण व्यवस्था के कारण स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। किसानों के अनुसार खेती का यह सबसे महत्वपूर्ण समय है और जुताई में देरी होने से फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
खेतों में खड़े ट्रैक्टर, प्रभावित हो रहे कृषि कार्य
डीजल की कमी का सबसे ज्यादा असर ट्रैक्टर आधारित कृषि कार्यों पर पड़ रहा है। कई गांवों में ट्रैक्टर डीजल के अभाव में खड़े हैं, जिससे खेतों की तैयारी समय पर नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन में समय पर जुताई और बुवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। देरी होने पर उत्पादन और पैदावार दोनों पर असर पड़ सकता है।
सीमित आपूर्ति के कारण बढ़ी परेशानी
पंप संचालकों का कहना है कि उपलब्ध स्टॉक के अनुसार ही डीजल का वितरण किया जा रहा है। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियंत्रित आपूर्ति की जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोगों को ईंधन मिल सके। हालांकि ग्रामीण इलाकों में डीजल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बना हुआ है।
किसानों ने की प्राथमिकता से आपूर्ति की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय पर जुताई नहीं हो सकी तो खरीफ सीजन प्रभावित होगा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका इस समय कृषि गतिविधियों पर टिकी हुई है, इसलिए ईंधन संकट का जल्द समाधान किया जाना आवश्यक है।




