सीजी भास्कर, 17 नवंबर। सन सिटी में डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest Fraud) का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों में दहशत और सतर्कता दोनों बढ़ा दी है। अमेरिका से हाल ही में लौटी एक एनआरआइ वृद्धा को साइबर ठगों ने पहले फर्जी जांच का भय दिखाया और फिर झांसे में लेकर 80 लाख रुपए हड़प लिए। पीड़िता ने पूरी घटना की शिकायत राजनांदगांव कोतवाली थाने में दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली टीआई नंदकिशोर गौतम के अनुसार पीड़िता शीला सु बाल के पास सबसे पहले एक फोन आया, जिसमें कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने कहा कि पीड़िता का नाम एक बड़े मनीलांड्रिंग केस में सामने आया है और उनकी जांच की जा रही है। यह सुनते ही वृद्धा डर गईं। इसके बाद एक अन्य नंबर से फोन कर एक व्यक्ति ने स्वयं को जांच अधिकारी बताया और बेहद कड़े स्वर में उनसे कहा कि जांच पूरी होने तक उनके बैंक खातों की पूरी राशि एक सुरक्षित खाते में ट्रांसफर करनी होगी। (Cyber Crime Alert)
बैंक कर्मियों ने समझाया, फिर भी नहीं मानीं
पीड़िता ने डर और भ्रम के चलते अपने अलग-अलग खातों से कुल 80 लाख रुपए ठगों द्वारा बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस दौरान जब वह बैंक पहुंचीं तो कर्मचारियों ने उन्हें दो बार समझाया कि ऐसे कॉल अक्सर फर्जी होते हैं और कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे जमा करने के लिए नहीं कहती। हालांकि ठगों की लगातार धमकियों के कारण पीड़िता किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हुईं।
रकम भेजने के कुछ देर बाद ही जब ठगों के फोन बंद हो गए, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुकी हैं। कोतवाली पुलिस अब साइबर सेल की मदद से कॉलर की पहचान, खातों की ट्रांजैक्शन और फंड ट्रेल की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए लोगों को जागरूक होना बेहद जरूरी है।


