सीजी भास्कर, 4 मई । कोटा क्षेत्र के छेरकाबांधा इलाके में संचालित एक डिस्टलरी से निकल रहा जहरीला धुआं और प्रदूषित पानी आसपास के गांवों और जंगल के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। (Distillery havoc)
फैक्ट्री के आसपास के गांवों में दुर्गंध का असर साफ देखा जा सकता है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों की मजबूरी और खामोशी : Distillery havoc
पीपरापारा गांव के लोगों के अनुसार फैक्ट्री के कारण फैल रही बदबू अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। कई ग्रामीण फैक्ट्री में ही काम करते हैं, जिससे विरोध की आवाज कमजोर पड़ जाती है। लोगों का कहना है कि रोजगार के कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर पाते, जबकि प्रशासन की ओर से भी कोई प्रभावी हस्तक्षेप नजर नहीं आता।
जंगल और पर्यावरण पर गंभीर असर
फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के जंगलों में छोड़ा जा रहा है, जहां यह बड़े गड्ढों और तालाबों में जमा हो रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस पानी से न केवल बदबू फैलती है, बल्कि पेड़-पौधों और वन्यजीवों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। बरसात के दिनों में यह प्रदूषित पानी नालों तक पहुंचकर व्यापक क्षेत्र को प्रभावित करता है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
नियमों के अनुसार हर डिस्टलरी में निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी तैनात होते हैं, लेकिन यहां प्रदूषण के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, फैक्ट्री प्रबंधन और उससे जुड़े मामलों को लेकर पहले भी जांच और कार्रवाई की खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन जमीनी हालात में सुधार नहीं दिख रहा है। (Distillery havoc)


