सीजी भास्कर, 4 मई । नक्सल हिंसा और गरीबी से जूझ रहे बस्तर के कई परिवारों ने अपने बच्चों को सुरक्षा और भोजन के लिए आवासीय छात्रावासों में भेजा था। अब यही बच्चे खेल के मैदान में अपनी पहचान बना रहे हैं और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। ( From struggle to success)
हॉस्टल से शुरू हुआ सफर, खेल ने दी पहचान : From struggle to success
बस्तर के आवासीय छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को पहले सिर्फ सुरक्षा और भोजन के उद्देश्य से भेजा गया था। बाद में इन्हें खेल प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आई। अब तक 11 खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना चुके हैं। बच्चों की प्राकृतिक सहनशक्ति और मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
डर और अभाव के बीच उभरी नई उम्मीद
नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए छात्रावास एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरे। कई बच्चों ने पहली बार गांव से बाहर निकलकर बड़े शहरों और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव किया। वॉलीबॉल और अन्य खेलों में भाग लेकर वे नई पहचान बना रहे हैं और अपने परिवार के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
सरकारी पहल और प्रशिक्षण का असर
खेल परिसर और आवासीय योजनाओं के जरिए बच्चों को मुफ्त शिक्षा, भोजन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। कोच और अधिकारियों की मदद से गांव-गांव जाकर अभिभावकों को जागरूक किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब बड़ी संख्या में बच्चे खेलों में आगे बढ़ रहे हैं और अपने भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। (From struggle to success)


