सीजी भास्कर, 28 जून। बाहरी डॉक्टरों की प्रैक्टिस (Doctor Practice Rule) को लेकर छत्तीसगढ़ में विवाद गहराता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस की अनुमति देने के प्रस्ताव का प्रदेश के डॉक्टर लगातार विरोध कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इससे स्थानीय डॉक्टरों के हित प्रभावित होंगे, जबकि सरकार इसे स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की कमी दूर करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।
डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए लिया गया फैसला
बाहरी डॉक्टरों की प्रैक्टिस (Doctor Practice Rule) पर उठे विवाद के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी करने के बजाय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की चुनौतियों को भी समझना चाहिए।
एनएमसी पंजीकृत डॉक्टरों को ही मिलेगी अनुमति
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी डॉक्टर को बिना वैध दस्तावेजों के अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल वही चिकित्सक छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस कर सकेंगे, जिनके पास किसी अन्य राज्य का वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन होगा और जो बाहरी डॉक्टरों की प्रैक्टिस (Doctor Practice Rule) के तहत नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) में पंजीकृत होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार जल्द ही प्रदेश के डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से चर्चा करेगी, ताकि सभी पक्षों की राय लेकर आगे की प्रक्रिया तय की जा सके।
125 पद निकले, लेकिन मिले केवल 78 डॉक्टर
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार लगातार डॉक्टरों की भर्ती कर रही है। हाल ही में मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के 125 नियमित पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन इसके मुकाबले केवल 78 डॉक्टर ही उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम करना आवश्यक हो गया है।
कई राज्यों में पहले से लागू है व्यवस्था
मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला पहला राज्य नहीं होगा। देश के कई अन्य राज्यों में भी दूसरे राज्यों के पंजीकृत डॉक्टरों को निर्धारित शर्तों के तहत सेवाएं देने की अनुमति पहले से दी जा रही है। सरकार भी इसी मॉडल का अध्ययन कर आगे बढ़ रही है।
पल्स पोलियो अभियान में भी लिया हिस्सा
विवाद के बीच स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रीय Pulse Polio Immunization Programme के तहत आयोजित अभियान में बच्चों को ‘जिंदगी की दो बूंद’ पोलियो की खुराक भी पिलाई। उन्होंने प्रदेश के सभी अभिभावकों से अपील की कि वे पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं और पोलियो मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत बनाएं।



