सीजी भास्कर, 28 जून। हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण एवं विपणन तक जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत झुझरकस्सा के आश्रित ग्राम कोर्रेमुडा में जिला पंचायत धमतरी, जनपद पंचायत नगरी और प्रदान संस्था के संयुक्त सहयोग से एक दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के तहत अब तक 250 किसानों ने 10 टन गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज खरीदे हैं, जिनसे लगभग 250 टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कृषि मित्रों को मिला आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण
हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण में नगरी और मगरलोड विकासखंड के कृषि मित्रों तथा पीआरपी ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, ताकि वे किसानों तक नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीके पहुंचा सकें।
भूमि तैयारी से लेकर कटाई तक दी गई पूरी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने भूमि की तैयारी, उन्नत एवं रोगमुक्त बीज (राइजोम) का चयन, बीज उपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, फसल संरक्षण, वैज्ञानिक कटाई तथा कटाई के बाद प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों को बताया गया कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ यदि प्रसंस्करण और बेहतर विपणन की व्यवस्था हो तो हल्दी की खेती अधिक लाभकारी साबित हो सकती है।
250 किसानों ने खरीदे 10 टन बीज
इस परियोजना के तहत अब तक 250 किसानों ने गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) के माध्यम से लगभग 10 टन हल्दी बीज (राइजोम) खरीदे हैं। इन बीजों से लगभग 270 दिनों में 250 टन हल्दी उत्पादन होने का अनुमान है। खेती के प्रत्येक चरण में कृषि मित्रों और एफपीओ के माध्यम से किसानों को नियमित तकनीकी मार्गदर्शन और फील्ड सपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रसंस्करण और विपणन की भी होगी मजबूत व्यवस्था
उत्पादित हल्दी का प्रसंस्करण हरिभूमि किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए जिला पंचायत धमतरी द्वारा कोर्रेमुडा में आधुनिक हल्दी प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है। यहां तैयार होने वाले हल्दी पाउडर का विपणन गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी करेगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सकेगा।
उत्पादन से ब्रांडिंग तक बनेगी मजबूत वैल्यू चेन
हल्दी की वैज्ञानिक खेती (Turmeric Farming) की यह पहल किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला से जोड़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कृषि आधारित उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले में कृषि आधारित उद्यमिता, किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने और मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि नगरी क्षेत्र की ऊपरी भूमि में हल्दी उत्पादन का विस्तार किसानों के लिए अतिरिक्त एवं स्थायी आय का मजबूत माध्यम बनेगा। आने वाले वर्षों में वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण और संगठित विपणन की यह समन्वित व्यवस्था नगरी को प्रदेश के प्रमुख हल्दी उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



