सीजी भास्कर, 14 अगस्त : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के प्रसिद्ध गंगरेल बांध में जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ (Gangrel Dam Statue Mystery) की करीब 37 साल पुरानी दुर्लभ सफेद संगमरमर की प्रतिमा मिलने से जैन समाज में हलचल तेज हो गई है। करीब 11 इंच ऊंची प्रतिमा को 12 अगस्त की देर रात ससम्मान धमतरी के श्री पार्श्वनाथ जिनालय में सुरक्षित स्थापित कराया गया। प्रतिमा मिलने के बाद इसके गायब होने और गंगरेल बांध तक पहुंचने का रहस्य भी गहरा गया है। प्रतिमा पर मौजूद बहुमूल्य आभूषण गायब हैं, जिससे प्रतिमा चोरी होने की आशंका जताई जा रही है।
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प्रतिमा पर दर्ज है 2046 विक्रम संवत का उल्लेख
मिली संगमरमर की प्रतिमा पर विक्रम संवत 2046 और ‘शंकर नगर रायपुर’ अंकित है। इसी आधार पर प्रतिमा को करीब 37 वर्ष पुरानी माना जा रहा है। प्रतिमा पर पूज्य जिन उदय सागर जी महाराज और उनके शिष्य महोदय सागर जी महाराज के नाम भी उत्कीर्ण हैं। इन महत्वपूर्ण निशानों के आधार पर प्रतिमा के मूल स्थान का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि दोनों संतों का देहावसान हो चुका है। ऐसे में उनके संघों और पुराने रिकॉर्ड के माध्यम से प्रतिमा के निर्माण, स्थापना और मूल जिनालय से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।
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बोटिंग हाउस से जिनालय तक पहुंची प्रतिमा
गंगरेल घूमने पहुंचे दुर्ग दिगंबर जैन समाज के पर्यटकों ने बोटिंग टिकट घर पर इस प्रतिमा को देखा। बताया गया कि प्रतिमा बांध के जलस्तर वाले क्षेत्र में मिली थी। इसके बाद दुर्ग समाज की सूचना पर श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ धमतरी के अध्यक्ष विजय गोलछा की टीम गंगरेल पहुंची और प्रतिमा को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।
आभूषण गायब होने से बढ़ी चोरी की आशंका
प्रतिमा पर मौजूद बहुमूल्य आभूषण गायब होने से इसके चोरी की आशंका और गहरा गई है। समाज में चर्चा है कि संभवत: प्रतिमा रायपुर के किसी जिनालय से चोरी की गई होगी और पहचान छिपाने के लिए उसे गंगरेल बांध के जलस्तर वाले क्षेत्र में फेंक दिया गया होगा। हालांकि, प्रतिमा चोरी (Gangrel Dam Statue Mystery) की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विजय गोलछा ने बताया कि देशभर के जैन संघों को प्रतिमा की तस्वीरें भेजी गई हैं। पुलिस को भी आधिकारिक सूचना दी जा रही है, ताकि प्रतिमा के मूल स्थान और इसके गंगरेल बांध तक पहुंचने की पूरी जानकारी सामने आ सके।
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37 साल पुरानी प्रतिमा ने खड़े किए कई सवाल
गंगरेल बांध में दुर्लभ प्रतिमा मिलने के बाद कई सवाल सामने हैं। अगर प्रतिमा किसी जिनालय से चोरी हुई थी तो इतने वर्षों तक वह कहां रही? उसे बांध में किसने और कब फेंका? प्रतिमा के बहुमूल्य आभूषण कहां गए? क्या प्रतिमा के गायब होने की उस समय कोई रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल प्रतिमा के शिलालेख और उस पर दर्ज नामों को जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है। इस गंगरेल प्रतिमा रहस्य (Gangrel Dam Statue Mystery) से पर्दा जांच पूरी होने के बाद ही उठ सकेगा।




