सीजी भास्कर, 31 जनवरी | कवर्धा। कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में सामने आई कथित Education Scam Kabirdham से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्रवाई तत्कालीन कार्यालय में पदस्थ रहे वर्ग-2 कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप के खिलाफ की गई है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है, ताकि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच बिना किसी प्रशासनिक दबाव के आगे बढ़ सके।
218 करोड़ के लेन-देन पर उठे सवाल
पूरे मामले की जड़ बीते तीन वर्षों में कोषालय से निकाले गए लगभग 218 करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़ी है। ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच कैश बुक, बिल रजिस्टर और वाउचर जैसे अहम वित्तीय अभिलेख उपलब्ध नहीं पाए गए। इसी आधार पर तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी संजय जायसवाल के कार्यकाल को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
पूर्व बीईओ ने आरोपों को बताया निराधार
पूर्व बीईओ संजय जायसवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान शिक्षकों के वेतन का भुगतान नियमित रूप से हुआ और सभी वित्तीय दस्तावेज 11 दिसंबर 2025 को विधिवत वर्तमान अधिकारी को सौंप दिए गए थे, जिसकी रसीद उनके पास सुरक्षित है।
दस्तावेज संधारण में लापरवाही का दावा
संजय जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 के अपने कार्यकाल के दौरान कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप को बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, वित्तीय दस्तावेजों का सही ढंग से संधारण नहीं किया गया। इस संबंध में नोटिस भी जारी हुआ था, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
जांच के दायरे में ऑडिट की खामियां
जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर यह स्वीकार किया है कि जांच के दौरान कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत कमियां सामने आई हैं। विभाग का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो निलंबन के बाद विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है। फिलहाल शिक्षा विभाग इस संवेदनशील मामले में हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहा है।
देखें आदेश की कॉपी




