सीजी भास्कर, 17 जुलाई : छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों पर ₹3117.49 करोड़ का बिजली बिल बकाया है। बिजली बिल बकाया छत्तीसगढ़ (Electricity Bill Dues Chhattisgarh) का मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायक इंद्र साव ने सरकार पर बड़े बकायादारों से वसूली नहीं करने और आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया। जवाब में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बकाया वसूली लगातार जारी है और बिजली दरों का निर्धारण सरकार नहीं बल्कि राज्य विद्युत नियामक आयोग करता है।
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Electricity Bill Dues Chhattisgarh कुल 5853 करोड़ से ज्यादा बकाया
विधानसभा में सरकार ने बताया कि मई 2026 तक राज्य में कुल ₹5,853.86 करोड़ का बिजली बिल बकाया है। इसमें ₹3,117.49 करोड़ सरकारी विभागों पर, जबकि ₹2,736.37 करोड़ निजी और अन्य उपभोक्ताओं पर बकाया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में मई माह तक सरकारी विभागों से ₹249.06 करोड़ की वसूली की जा चुकी है और बकाया राशि वसूलने की कार्रवाई लगातार जारी है।
कांग्रेस का आरोप- बड़े बकायादारों पर नरमी, जनता पर बोझ
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायक इंद्र साव ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनी बड़े बकायादारों से प्रभावी वसूली नहीं कर पा रही है। इसकी भरपाई आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरें बढ़ाकर की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय निकाय, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), स्कूल शिक्षा और गृह विभाग समेत कई सरकारी विभागों पर भारी बिजली बिल बकाया है।
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1300 करोड़ रुपये बड़े बकायादारों पर बकाया
इंद्र साव ने सदन में दावा किया कि एक लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वाले प्रभावशाली उपभोक्ताओं पर करीब ₹1300 करोड़ की राशि बकाया है। उनका कहना था कि यदि सरकार इन बड़े बकायादारों से प्रभावी वसूली करे तो बिजली दरें बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सरकार बोली- बिजली दरें आयोग तय करता है
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि बिजली दरों का निर्धारण राज्य सरकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग करता है। आयोग बिजली खरीद लागत, वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति, बाजार की परिस्थितियों और जनसुनवाई जैसे विभिन्न पहलुओं के आधार पर दरें तय करता है।
उन्होंने बताया कि निजी उपभोक्ताओं से भी नियमानुसार बकाया वसूली की जा रही है। वहीं सरकारी विभागों में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रीपेड बिजली कनेक्शन की व्यवस्था लागू की जा रही है।
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सूर्य घर योजना को लेकर भी हुई चर्चा
इंद्र साव ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी बकाया वसूली की बजाय प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार में अधिक व्यस्त हैं।
इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 1.85 लाख से अधिक लोगों ने इस योजना में पंजीयन कराया है। इनमें 76 हजार से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। योजना के तहत केंद्र सरकार ने ₹482.56 करोड़ और राज्य सरकार ने ₹161 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराई है, जिससे हजारों परिवारों का बिजली बिल शून्य या काफी कम हो गया है।
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1 जुलाई से बढ़ी हैं बिजली की नई दरें
गौरतलब है कि 1 जुलाई 2026 से छत्तीसगढ़ में बिजली की नई दरें लागू हो चुकी हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत बिजली दर वृद्धि को मंजूरी दी है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तथा गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली महंगी हुई है।



