उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात बताते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। साथ ही कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं।
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जगदलपुर में हुई पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने कहा कि भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और संघ परिवार से जुड़े संगठनों ने सालों तक राम मंदिर आंदोलन के नाम पर राजनीति की और लोगों से चंदा जुटाया।
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चंदे और चढ़ावे में पारदर्शिता पर उठाए सवाल : Mohan Markam statement
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मोहन मरकाम ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के दौरान एकत्रित चंदे और वर्तमान में मंदिर में आने वाले चढ़ावे को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले चंदे में हेराफेरी और अब चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी थी तो शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे क्यों हुए और स्वतंत्र जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पूर्व मंत्री ने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी सहित अन्य पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है।
पार्टी का कहना है कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही राम मंदिर के लिए प्राप्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और खर्चों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कांग्रेस बोली- भगवान राम किसी दल की संपत्ति नहीं : Mohan Markam statement
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मोहन मरकाम ने कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि देश की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देश को मिलना चाहिए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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