सीजी भास्कर, 17 जुलाई : छत्तीसगढ़ विधानसभा ने Chhattisgarh Ease of Doing Business Act 2026 पारित कर राज्य में उद्योग और व्यापार को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू किए जा रहे इस कानून का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को तेज करना और निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है। सरकार का दावा है कि इस कानून से करीब 15 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को सीधा लाभ मिलेगा।
Chhattisgarh Ease of Doing Business Act 2026 क्या है
नए कानून के तहत राज्य में रिस्क बेस्ड और ट्रस्ट बेस्ड बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू किया जाएगा। कारोबारों को उनके जोखिम स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। कम जोखिम वाले उद्योगों को त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि बड़े उद्योगों के आवेदन भी तय समय-सीमा में निपटाए जाएंगे।
यदि निर्धारित समय के भीतर संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करता है तो कुछ मामलों में डीम्ड अप्रूवल की व्यवस्था भी लागू होगी, जिससे निवेशकों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सेल्फ सर्टिफिकेशन से आसान होगा कारोबार
Chhattisgarh Ease of Doing Business Act 2026 के तहत कम जोखिम वाले कारोबारों के लिए बार-बार सरकारी निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी। कारोबारी स्वयं नियमों के पालन का सेल्फ सर्टिफिकेशन कर सकेंगे या अधिकृत इंजीनियर, आर्किटेक्ट अथवा विशेषज्ञ का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और उद्योगों को जल्द संचालन की अनुमति मिल सकेगी।
Chhattisgarh Ease of Doing Business Act 2026 43 सरकारी सेवाएं होंगी आसान
नए कानून के पहले चरण में 8 विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इनमें पानी कनेक्शन के लिए स्व-घोषणा, फर्म और सोसायटी का आसान पंजीकरण तथा भवन निर्माण योजना की सरल मंजूरी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा कारोबारियों को हर वर्ष लाइसेंस और विभिन्न अनुमतियों का नवीनीकरण कराने की आवश्यकता भी नहीं होगी, जिससे प्रशासनिक बोझ कम होगा।
MSME और निवेशकों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
सरकार का मानना है कि Chhattisgarh Ease of Doing Business Act 2026 से सबसे अधिक लाभ MSME सेक्टर को मिलेगा। नई व्यवस्था से उद्योग लगाने की प्रक्रिया तेज होगी, निवेश आकर्षित होगा और छत्तीसगढ़ में रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।
सरकार का अनुमान है कि इस कानून का सीधा लाभ करीब 15 लाख MSME कारोबारियों तक पहुंचेगा।
राज्य और जिला स्तर पर होगी निगरानी
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया जाएगा। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे, जबकि जिला स्तर पर कलेक्टर इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अन्य विभागों और सेवाओं को भी इस कानून के दायरे में शामिल किया जाएगा।



