सीजी भास्कर, 16 जुलाई। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर गुरुवार को रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रथयात्रा के लिए अलग-अलग मार्ग और समय निर्धारित किए गए हैं तथा लोगों से घर से निकलने से पहले ट्रैफिक व्यवस्था की जानकारी लेने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। (Raipur Jagannath Rath Yatra)

राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा परंपरा का निर्वहन : Raipur Jagannath Rath Yatra
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रायपुर की रथयात्रा की सबसे विशेष परंपरा ‘छेरापहरा’ है। इस परंपरा के तहत महाप्रभु जगन्नाथ के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी दो सोने की झाड़ुओं से की जाती है। इनमें से एक झाड़ू राज्यपाल और दूसरी मुख्यमंत्री के हाथ में होती है। दोनों रथ के आगे चलकर इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।
रथयात्रा को लेकर शहर के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों को आकर्षक फूलों से सजाया गया है। जिन मार्गों से रथयात्रा निकलेगी, वहां साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। आयोजन के दौरान भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यातायात व्यवस्था भी दुरुस्त की है।
धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने ओडिशा के पुजारी भी आमंत्रित : Raipur Jagannath Rath Yatra
गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष भी ओडिशा से आए कलाकारों ने पारंपरिक शैली में मंदिर और रथों को सजाया है। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों पर पुरी की तर्ज पर रंग-बिरंगी धार्मिक चित्रकारी और पारंपरिक अलंकरण किया गया है। धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है।
रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। लगभग 500 वर्ष पुराने इस मंदिर को पहले ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ यहां भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद इसकी पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में बनी।
इस मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के साथ श्रीराम दरबार, दो शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गरुड़ मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर भी स्थित हैं। यही कारण है कि यह मंदिर वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है।
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