सीजी भास्कर, 16 जुलाई। कानूनी गलियारों में गुरुवार को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ा फैसला चर्चा (Allahabad HC) का विषय बना रहा। लंबे समय से चल रहे इस मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को राहत मिलने के बाद अदालत की टिप्पणी पर भी सबकी नजर टिक गई। फैसले के बाद मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गईं।
अदालत के बाहर भी इस निर्णय को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि आखिर किन परिस्थितियों में अदालत ने जमानत मंजूर की और फैसले में कौन से कानूनी आधारों को महत्व दिया गया।

अदालत ने आपराधिक इतिहास को अकेला आधार मानने से किया इनकार Allahabad HC
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में दर्ज एफआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास अपने आप में जमानत खारिज करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता। जब तक यह नहीं दिखाया जाए कि आरोपी के फरार होने, गवाहों को प्रभावित करने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की आशंका है, तब तक केवल इसी आधार पर राहत नहीं रोकी जा सकती।
जमानत का मकसद ट्रायल में मौजूदगी सुनिश्चित करना
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जमानत का उद्देश्य आरोपी को दोषमुक्त घोषित करना नहीं, बल्कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी अदालत में नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार अदालत को ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे सकी जिससे यह साबित हो कि निरंजन दास जांच को प्रभावित कर सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे। इसी वजह से अदालत ने उन्हें राहत देने का फैसला सुनाया।
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कथित आबकारी नीति और होलोग्राम से जुड़ा है मामला Allahabad HC
अभियोजन के मुताबिक, निरंजन दास पर आरोप है कि आबकारी आयुक्त रहते हुए उन्होंने ऐसी नीति और निविदा व्यवस्था तैयार कराई जिससे नोएडा की एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचा। जांच एजेंसियों का दावा है कि कथित नकली होलोग्राम के इस्तेमाल से शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। इसी कारण छत्तीसगढ़ के साथ साथ उत्तर प्रदेश में भी मामला दर्ज किया गया, क्योंकि होलोग्राम की छपाई नोएडा में होने का आरोप है।
सर्वोच्च न्यायालय से पहले ही मिल चुकी थी राहत
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मुख्य शराब घोटाले के मामले में सर्वोच्च न्यायालय मई 2026 में निरंजन दास को पहले ही जमानत (Allahabad HC) दे चुका है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि उत्तर प्रदेश में जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।
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लंबा चल सकता है मुकदमा
हाईकोर्ट ने माना कि मामले में 22 गवाह शामिल हैं और आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अब ट्रायल में समय लग सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि कथित आर्थिक नुकसान छत्तीसगढ़ में हुआ है। सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने निरंजन दास की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
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