सीजी भास्कर, 14 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की गुणवत्ता का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई दवा कंपनी के उत्पादों की छत्तीसगढ़ में खरीद और आपूर्ति को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। विपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि किसी कंपनी की दवा गुणवत्ता मानकों पर विफल पाई गई थी, तो उसके संबंध में राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए। (Blacklisted medicine controversy)

विपक्ष का हमला: “गुजरात में बैन, छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं?” : Blacklisted medicine controversy
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि जिस दवा को गुजरात में गुणवत्ता के आधार पर ब्लैकलिस्ट किया गया, उसे छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया। वहीं विधायक अटल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि राज्य में मरीजों को बिना गुणवत्ता जांच के दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने पूछा कि क्या दवाओं की खरीद से पहले अनिवार्य प्री-टेस्टिंग नहीं कराई जाती।
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स्वास्थ्य मंत्री का जवाब: “दवा आने के बाद होती है जांच”
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि सीजीएमएससी के निर्धारित नियमों के तहत दवाओं की प्री-टेस्टिंग नहीं होती, बल्कि आपूर्ति के बाद राज्य की प्रयोगशालाओं में बैच टेस्टिंग कर गुणवत्ता की जांच की जाती है।
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अटल श्रीवास्तव ने पूछे कई अहम सवाल : Blacklisted medicine controversy
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अनुपस्थिति में विधायक अटल श्रीवास्तव ने सरकार से पूछा कि क्या गुजरात द्वारा ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की जानकारी छत्तीसगढ़ सरकार और सीजीएमएससी को मिली थी। साथ ही उन्होंने कंपनी से हुई खरीद, भुगतान, संविदा दर, बैच टेस्टिंग और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी भी मांगी।
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सरकार का स्पष्टीकरण: “ब्लैकलिस्ट दवा और खरीदी गई दवा अलग”
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को बताया कि गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट 75 व 150 मिलीग्राम को गुणवत्ता मानकों पर विफल होने के कारण ब्लैकलिस्ट किया था, जिसकी सूचना 25 मार्च 2026 को सीजीएमएससी को प्राप्त हुई थी।
हालांकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में जिस दवा की खरीदी की गई, वह एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड टैबलेट) थी, जो गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट दवा से अलग उत्पाद है। इसलिए विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
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