सीजी भास्कर, 21 मई : तमिलनाडु में नवगठित सरकार के गठन (Tamil Nadu Floor Test) को लेकर सियासी और कानूनी घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ कथित ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, जांच पूरी होने तक राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन लागू करने की गुहार लगाई है। यह याचिका मदुरै के निवासी के.के. रमेश द्वारा दायर की गई है।
टीवीके (TVK) पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप
याचिकाकर्ता ने राज्य के मुख्यमंत्री और मशहूर अभिनेता सी. जोसेफ विजय (Tamil Nadu Floor Test) की राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) पर सीधे आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया है कि हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद टीवीके ने अनैतिक रूप से हॉर्स ट्रेडिंग का सहारा लिया और विपक्षी दलों के विधायकों को प्रलोभन देकर सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन हासिल किया। के.के. रमेश ने अपनी इस कानूनी लड़ाई में भारतीय संघ (केंद्र सरकार), सीबीआई और तमिलनाडु सरकार को मुख्य पक्षकार (प्रतिवादी) बनाया है।
बहुमत से दूर रहने के बाद ऐसे बनी सरकार
सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के अनुसार, विधानसभा चुनाव के नतीजों में टीवीके सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में तो उभरी, लेकिन वह अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल नहीं कर पाई थी। याचिका में चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 4 मई 2026 को घोषित हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों में टीवीके ने सबको चौंकाते हुए 108 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद, सरकार गठन के लिए टीवीके को कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम) और आईयूएमएल (IUML) जैसी पार्टियों का समर्थन मिला, जिसके बाद 10 मई 2026 को जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ ली।
फ्लोर टेस्ट के दौरान एआईएडीएमके (AIADMK) में बड़ी सेंधमारी
याचिकाकर्ता के मुताबिक, असली विवाद और संशय तब पैदा हुआ जब राज्यपाल द्वारा सरकार को विधानसभा (Tamil Nadu Floor Test) में अपना बहुमत साबित करने (फ्लोर टेस्ट) के लिए कहा गया। फ्लोर टेस्ट के दौरान अचानक टीवीके गठबंधन का समर्थन आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से 144 के पार पहुंच गया। इस शक्ति परीक्षण के दौरान मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) के करीब 25 विधायकों ने अपनी ही पार्टी लाइन से अलग जाकर सत्ताधारी टीवीके के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर दी।
विपक्ष के इतने बड़े वर्ग द्वारा पाला बदलने की इस अप्रत्याशित घटना ने राज्य के पूरे राजनीतिक परिदृश्य को हैरान कर दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विपक्ष के इन 25 विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए भारी वित्तीय भ्रष्टाचार और ऊंचे पदों का लालच दिया गया है, जिसकी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है।



