सीजी भास्कर, 21 मई। प्रदेश में सरकार के कार्यकाल का समय तेजी से कम हो रहा है, लेकिन निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड, प्राधिकरण और शोधपीठों में अब भी 300 से अधिक राजनीतिक पद खाली पड़े हैं। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और विभिन्न शोधपीठों के पद शामिल हैं। लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अब असंतोष बढ़ने लगा है। (Political appointments stalled)
निगम-मंडलों में खाली पड़े अहम पद : Political appointments stalled
प्रदेश के कई महत्वपूर्ण संस्थानों में अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। छत्तीसगढ़ केश शिल्पी बोर्ड, राज्य उर्दू अकादमी, दीनदयाल शोधपीठ, कबीर शोधपीठ, स्वामी विवेकानंद शोधपीठ और पं. सुंदरलाल शर्मा शोधपीठ जैसे संस्थानों में अध्यक्ष पद खाली हैं। वहीं श्रम कल्याण मंडल, सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन, गौ सेवा आयोग, पर्यटन मंडल, कृषक कल्याण परिषद और क्रेडा समेत कई संस्थाओं में उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां लंबित हैं।
संगठन में बढ़ रही नाराजगी
राजनीतिक नियुक्तियों को संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। पार्टी से जुड़े कई नेता, चुनाव हार चुके दावेदार और सामाजिक समीकरण साधने वाले चेहरे लंबे समय से जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, देरी के कारण कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है और संगठन के भीतर लगातार इसको लेकर चर्चा हो रही है।
सरकार के सामने समय की चुनौती : Political appointments stalled
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द नियुक्तियां नहीं हुईं तो इन पदों का राजनीतिक फायदा सीमित रह जाएगा। जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी, उन्हें क्षेत्र में प्रभाव बनाने, योजनाओं में सक्रियता दिखाने और चुनाव से पहले नेटवर्क तैयार करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए होगा। ऐसे में सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ता जा रहा है।



