सीजी भास्कर, 12 जनवरी। गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर अंतर्गत राजापड़ाव-गौरगांव क्षेत्र में गांवों के विद्युतीकरण (Electrification) की एक सूत्री मांग को लेकर हजारों ग्रामीण सोमवार सुबह सात बजे से मैनपुर-देवभोग-गरियाबंद नेशनल हाईवे पर धरने पर बैठ गए हैं। समाचार लिखे जाने तक 12 घंटे से अधिक समय से सड़क जाम की स्थिति बनी हुई है। कड़ाके की ठंड के बीच राशन-पानी, बैनर-पोस्टर और तख्तियां लेकर बैठे ग्रामीण टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।
नेशनल हाईवे पर जाम के कारण ओड़िशा से रायपुर तक आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। कई-कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक गांवों में विद्युतीकरण (Electrification) का कार्य शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। शासन-प्रशासन के खिलाफ लगातार नारेबाजी की जा रही है।
स्थानीय एसडीएम, एसडीओपी और बिजली विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। समाचार लिखे जाने तक अपर कलेक्टर पंकज डाहिरे भी मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा कर रहे थे, लेकिन प्रशासनिक मान-मनौव्वल अब तक असफल रही है।
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम के नेतृत्व में हो रहे इस सड़क जाम में हजारों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्ग शामिल हैं। आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के 78 साल बाद भी वे अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, रोजगार के साधन, सिंचाई व्यवस्था और लघु उद्योग ठप पड़े हैं, जबकि स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर भी गहरा असर पड़ा है।
मौके पर जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि करीब डेढ़ माह पूर्व विद्युतीकरण (Electrification) की मांग को लेकर शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था। पांच पंचायतों में पहले से स्वीकृत कार्य को अचानक रोक दिया गया और केवल आश्वासन दिए गए। भूमिगत विद्युत लाइन विस्तार का बहाना बनाकर ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है। इसी उपेक्षा से क्षुब्ध होकर ग्रामीण सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन आर-पार का है।
आंदोलन की अगुवाई कर रहीं जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि राजापड़ाव क्षेत्र के हजारों ग्रामीण केवल एक ही मांग—बिजली—को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। जब तक विद्युतीकरण का कार्य प्रारंभ नहीं होता और ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।


