सीजी भास्कर, 15 मई। छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर अब बड़ा बदलाव दिखाई देने वाला है। शहरों की कॉलोनियों और बाजारों में जल्द (EV Charging) चार्जिंग प्वाइंट बढ़ने की तैयारी शुरू हो गई है। नए फैसले के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन चलाना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा।
कई इलाकों में अब तक लोगों को गाड़ी चार्ज करने के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन सरकार के नए नियम के बाद हालात बदल सकते हैं। बाजारों, मुख्य सड़कों और कामकाजी इलाकों के आसपास चार्जिंग सुविधा मिलने से इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने बदले विकास नियम : EV Charging
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में संशोधन किया है। इसके बाद शहरों और कस्बों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया आसान हो गई है। अब कई नई जगहों पर चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जा सकेगा।
नियमों के मुताबिक कॉलोनियों, बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों, जिला केंद्रों और प्रमुख सड़कों के किनारे चार्जिंग प्वाइंट तैयार किए जाएंगे। इन्हें मोबाइल टावर की तरह नेटवर्क मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई गई है।
पार्किंग में बनेंगे चार्जिंग प्वाइंट
नई व्यवस्था के तहत स्टैंडअलोन चार्जिंग स्टेशन के लिए अलग मानक तय किए गए हैं। कुल पार्किंग क्षमता के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाना जरूरी होगा।
इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के आसपास भी चार्जिंग सुविधा विकसित की जाएगी। सरकार ने बैटरी बदलने की सुविधा और इमारतों के भीतर मोबाइल नेटवर्क ढांचे को भी नए नियमों में शामिल किया है।
राजमार्गों पर भी बड़ा नेटवर्क तैयार होगा
नई नीति में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था (EV Charging) की गई है। दोनों तरफ हर 25 किलोमीटर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए जाएंगे ताकि लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों को परेशानी न हो।
भारी वाहनों और लंबा सफर करने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए हर 100 किलोमीटर में फास्ट चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किए गए हैं। इन जगहों पर बैटरी स्वैपिंग सुविधा भी उपलब्ध रहेगी जिससे कम समय में बैटरी बदलकर यात्रा जारी रखी जा सकेगी।
लोगों का भरोसा बढ़ाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार होने के बाद लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ेंगे। इससे आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।



