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Home » False Bribery Case Raipur: ₹100 की रिश्वत का आरोप, 39 साल बाद मिला न्याय – बुजुर्ग बोले, अब परिवार बर्बाद हो चुका है

False Bribery Case Raipur: ₹100 की रिश्वत का आरोप, 39 साल बाद मिला न्याय – बुजुर्ग बोले, अब परिवार बर्बाद हो चुका है

By Newsdesk Admin
24/09/2025
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False Bribery Case Raipur की यह कहानी 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया की है, जिन पर 1986 में ₹100 रिश्वत लेने का आरोप लगा। उस झूठे मामले ने उनकी नौकरी, परिवार और सम्मान सब छीन लिया। 39 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दिया। लेकिन देर से मिला न्याय, उनके जीवन में अपूरणीय क्षति छोड़ गया।

Contents
  • कैसे लगा रिश्वत का आरोप?
  • परिवार पर टूटा कहर
  • ट्रायल कोर्ट से हाईकोर्ट तक की जंग
  • न्याय मिला, लेकिन किस कीमत पर?
  • सबक और सवाल

कैसे लगा रिश्वत का आरोप?

अक्टूबर 1986 में जागेश्वर प्रसाद रायपुर स्थित एमपीएसआरटीसी दफ्तर में बिल सहायक के पद पर थे। एक कर्मचारी ने बिल पास कराने का दबाव डाला। जब उन्होंने इनकार किया, तो उस कर्मचारी ने रिश्वत देने की कोशिश की। अगले ही दिन उसने जबरन ₹100 (दो 50-50 के नोट) उनकी जेब में डाल दिए और विजिलेंस टीम ने छापा मारकर उन्हें पकड़ लिया। (False Bribery Case Raipur) इसी क्षण उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई।

परिवार पर टूटा कहर

मुकदमे की वजह से अवधिया 1988 से 1994 तक निलंबित रहे। वेतन आधा हो गया, प्रमोशन और इंक्रीमेंट रुक गए। चार बच्चों का परिवार तंगी में आ गया। उनकी पत्नी तनाव में रहने लगीं और असमय चल बसीं। बेटों की पढ़ाई छूट गई, समाज ने रिश्वतखोर का परिवार कहकर तिरस्कृत किया। छोटे बेटे नीरज अवधिया बताते हैं कि स्कूल में बच्चे उनसे बात तक नहीं करते थे। (False Bribery Case Raipur) का यह कलंक उनकी पूरी पीढ़ी को झेलना पड़ा।

ट्रायल कोर्ट से हाईकोर्ट तक की जंग

2004 में ट्रायल कोर्ट ने जागेश्वर को भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एक साल जेल और ₹1,000 जुर्माने की सजा दी। उन्होंने हार नहीं मानी और हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट की बेंच ने पाया कि अभियोजन पक्ष रिश्वत मांगने या लेने का ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। गवाह और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे। (False Bribery Case Raipur) का फैसला पलट गया और 39 साल बाद उन्हें निर्दोष घोषित किया गया।

न्याय मिला, लेकिन किस कीमत पर?

आज 83 की उम्र में जागेश्वर रायपुर स्थित पुश्तैनी घर में रहते हैं। उनकी आलमारी पुरानी फाइलों से भरी है – हर पन्ना उनकी लंबी लड़ाई की गवाही देता है। वे कहते हैं, “मेरा नाम साफ हो गया, लेकिन मेरा परिवार बर्बाद हो गया। अब बस बकाया पेंशन और सस्पेंशन अवधि का पैसा मिल जाए, ताकि बाकी जिंदगी बिना तंगी के कट सके।”

उनका बेटा नीरज जोड़ते हैं, “पापा बेगुनाह साबित हो गए, लेकिन हमारा बचपन और युवावस्था लौटकर नहीं आएगी। सरकार को चाहिए कि इस अन्याय की भरपाई करे।”

सबक और सवाल

False Bribery Case Raipur केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी की गहरी समस्या को उजागर करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मिलना चाहिए और न्याय व्यवस्था को तेज करना होगा। जागेश्वर की जिंदगी यह चेतावनी है कि एक झूठा आरोप किसी का पूरा जीवन तबाह कर सकता है।

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