सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को व्यवस्थित करने और खाद के वितरण में पारदर्शिता (Farmer ID Mandatory) लाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। आने वाले खरीफ सीजन 2026-27 से प्रदेश में खाद और यूरिया की खरीद के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी गई है। अब केवल उन्हीं किसानों को सोसायटियों से खाद मिल सकेगी, जिनके पास यह विशिष्ट पहचान पत्र होगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से उर्वरकों की कालाबाजारी पर लगाम लगेगी और वास्तविक जरूरतमंद किसानों को सही समय पर खाद उपलब्ध हो पाएगी।
समितियों से लेकर निजी दुकानों तक लागू होंगे नियम
नई व्यवस्था के तहत, यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को अपनी आईडी दिखानी होगी। फार्मर आईडी अनिवार्य (Farmer ID Mandatory) होने का असर केवल सरकारी समितियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी विक्रेताओं पर भी कड़े नियम लागू किए गए हैं। यदि कोई किसान बाजार में किसी निजी दुकान से खाद खरीदने जाता है, तो दुकानदार को अनिवार्य रूप से किसान का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। बिना इस डेटा प्रविष्टि के खाद की बिक्री नहीं की जा सकेगी।
कालाबाजारी रोकने और खाद संकट से निपटने की तैयारी
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आगामी खरीफ सीजन में खाद के संभावित संकट की आशंका को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है। फार्मर आईडी अनिवार्य (Farmer ID Mandatory) करने का मुख्य उद्देश्य अनियमित वितरण को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि खाद का स्टॉक केवल खेती के प्रयोजनों के लिए ही इस्तेमाल हो। इस व्यवस्था से खाद के कृत्रिम अभाव और ब्लैक मार्केटिंग करने वाले बिचौलियों पर नकेल कसी जा सकेगी।
पंजीकरण के बिना योजनाओं का लाभ भी मुश्किल
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फार्मर आईडी अनिवार्य (Farmer ID Mandatory) होने के बाद, जिन किसानों के पास यह आईडी नहीं होगी, उन्हें न केवल खाद मिलने में समस्या होगी, बल्कि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह सकते हैं। दुर्ग जिले के उदाहरण को देखें तो वहां लगभग सवा लाख किसानों ने अभी तक ‘एग्री टेक’ पोर्टल पर अपना पंजीकरण नहीं कराया है। अधिकारियों ने अपील की है कि किसान जल्द से जल्द अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें ताकि सीजन के दौरान उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


