सीजी भास्कर, 21 जून : विकासखंड मुंगेली के ग्राम जरहागांव स्थित श्रीराम जानकी मछुआ सहकारी समिति ने वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन (Fish Farming) कर ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है। वर्ष 2023 में गठित इस समिति ने शासकीय अमहा तालाब का उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इससे न केवल समिति की आय बढ़ी है, बल्कि गांव के मछुआ परिवारों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
समिति को वर्ष 2023-24 में लगभग 2.051 हेक्टेयर जलक्षेत्र वाले शासकीय अमहा तालाब का 10 वर्षों के लिए पट्टा प्रदान किया गया। इसके बाद मत्स्य पालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं के सहयोग से तालाब में सुनियोजित तरीके से मछली उत्पादन शुरू किया गया। विभाग द्वारा नियमित तकनीकी सलाह और निगरानी से उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई।
रोजगार के नए अवसर भी हुए सृजित
मछली उत्पादन बढ़ने के साथ ही गांव में परिवहन, विपणन और तालाब प्रबंधन से जुड़े अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी बने हैं। इससे स्थानीय युवाओं को गांव में ही आय अर्जित करने का अवसर मिला है और स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है।
समिति की अध्यक्ष मीनाबाई धुरी ने बताया कि विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीज, जाल तथा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा सदस्यों को तालाब प्रबंधन, आहार व्यवस्था, जल गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि समिति ने लगभग 2 हजार किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उत्पादकता प्राप्त करते हुए कुल 4,100 किलोग्राम मछली उत्पादन दर्ज किया।
स्थानीय बाजारों में उत्पादित मछलियों की अच्छी मांग रही, जिसके कारण समिति को लगभग 4 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। सभी खर्चों को घटाने के बाद 2.10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ। इस उपलब्धि ने समिति से जुड़े 21 सदस्यों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है।
महिलाओं की भागीदारी बनी सफलता की ताकत
समिति के संचालन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका रही है। वित्तीय प्रबंधन, उत्पादन गतिविधियों और विपणन कार्यों में सहभागिता से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी है, जिससे परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
समिति के सदस्यों का कहना है कि पहले आय के सीमित साधन होने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब नियमित आय के स्रोत विकसित होने लगे हैं। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करना आसान हुआ है।
मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासकीय योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और अनुदान उपलब्ध कराकर मछुआ समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अन्य समितियों के लिए बना प्रेरणादायक मॉडल
जरहागांव की यह सफलता आसपास के गांवों की सहकारी समितियों और मछुआ समूहों के लिए प्रेरणा बन रही है। विभाग का मानना है कि इसी मॉडल को अन्य तालाबों में लागू कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।
समिति की अध्यक्ष मीनाबाई धुरी ने इस उपलब्धि के लिए मत्स्य पालन विभाग और शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उचित मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण समुदाय आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।





