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Home » Floriculture Success Stories : फूलों की खुशबू से महकी किस्मत, परंपरागत खेती छोड़ अपनाई फूलों की खेती, कम लागत में मिला मोटा मुनाफा

Floriculture Success Stories : फूलों की खुशबू से महकी किस्मत, परंपरागत खेती छोड़ अपनाई फूलों की खेती, कम लागत में मिला मोटा मुनाफा

By Newsdesk Admin
28/04/2026
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सीजी भास्कर, 28 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव गमेकेरा से सफलता की एक ऐसी महक उठी है, जिसने पूरे क्षेत्र के किसानों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहाँ के एक प्रगतिशील किसान ईश्वरचरण पैकरा ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और नई सोच के साथ कृषि की जाए, तो मिट्टी से सोना उगाया जा सकता है। परंपरागत धान की खेती को अलविदा कहकर उन्होंने फूलों की खेती की शुरुआत की, जिससे न केवल उनकी आय बढ़ी बल्कि वे क्षेत्र के लिए (Floriculture Success Stories) का एक चमकता हुआ उदाहरण बन गए हैं।

Contents
  • परंपरागत खेती से बेहतर विकल्प
  • राष्ट्रीय बागवानी मिशन ने दिखाई नई राह
  • धान की तुलना में कई गुना अधिक लाभ
  • कम लागत, अधिक मुनाफा, एक स्थायी माडल
  • आत्मविश्वास में वृद्धि और भविष्य की योजनाएं
  • गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत
  • शासन की योजनाओं का व्यापक असर

परंपरागत खेती से बेहतर विकल्प

आमतौर पर छत्तीसगढ़ के किसान धान और गेहूं जैसी फसलों पर ही निर्भर रहते हैं, लेकिन इनमें लागत और मेहनत के मुकाबले मुनाफा काफी सीमित होता है। पैकरा भी लंबे समय तक इसी चक्र में फंसे रहे। हालांकि, बदलते समय के साथ उन्होंने बाजार की मांग को समझा। शादी-ब्याह, धार्मिक आयोजन और त्यौहारों में फूलों की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने उद्यानिकी की ओर रुख किया। उनकी यह यात्रा आज राज्य की सबसे सफल (Floriculture Success Stories) में गिनी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का भी मानना है कि गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की मांग साल के 12 महीने बनी रहती है, जो किसानों के लिए निरंतर आय का स्रोत है।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन ने दिखाई नई राह

ईश्वरचरण पैकरा की किस्मत तब बदली जब उन्होंने राज्य शासन की योजनाओं का लाभ उठाने का निर्णय लिया। वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उन्हें उद्यानिकी विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। विभाग के सहयोग से उन्होंने अपनी 0.400 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति से गेंदा फूलों की खेती शुरू की। वैज्ञानिक तरीकों और समय पर खाद-पानी के प्रबंधन ने इस पहल को (Floriculture Success Stories) में बदल दिया। विभाग ने उन्हें न केवल अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराए, बल्कि कीट प्रबंधन और फसल की कटाई के आधुनिक तौर-तरीके भी सिखाए।

धान की तुलना में कई गुना अधिक लाभ

आंकड़े बताते हैं कि पैकरा को पहले उतनी ही जमीन पर धान की खेती से मात्र 11 क्विंटल पैदावार मिलती थी, जिससे होने वाली कमाई बहुत कम थी। लेकिन फूलों की खेती ने गणित पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने 0.400 हेक्टेयर में करीब 38 क्विंटल गेंदा फूलों का उत्पादन किया। इस बंपर पैदावार से उनकी कुल आय 3 लाख 4 हजार रुपये तक जा पहुँची। सभी खर्चों और लागत को निकालने के बाद उन्हें 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह असाधारण मुनाफा रायगढ़ जिले की (Floriculture Success Stories) में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

कम लागत, अधिक मुनाफा, एक स्थायी माडल

फूलों की खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत और उच्च प्रतिफल है। धान के मुकाबले इसमें पानी और उर्वरकों का प्रबंधन अलग होता है, लेकिन एक बार फसल तैयार होने पर बाजार में इसकी कीमत बहुत अच्छी मिलती है। श्री पैकरा बताते हैं कि फूलों की खेती ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना दिया है। उनकी इस मेहनत का परिणाम है कि आज उनके खेत गेंदे के फूलों से लहलहा रहे हैं। यह सफलता न केवल निजी विकास है, बल्कि छत्तीसगढ़ की उन (Floriculture Success Stories) का हिस्सा है जो कृषि के स्वरूप को बदल रही हैं।

आत्मविश्वास में वृद्धि और भविष्य की योजनाएं

सफलता के इस स्वाद ने ईश्वरचरण के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। अब वे केवल गेंदा ही नहीं, बल्कि अन्य किस्म के फूलों की खेती करने पर भी विचार कर रहे हैं। वे अपनी जमीन के रकबे को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं ताकि वे बड़े स्तर पर आपूर्ति कर सकें। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं ने उन्हें एक नई पहचान दी है। उनकी यह व्यक्तिगत प्रगति अब राज्य की (Floriculture Success Stories) के रूप में सरकारी दस्तावेजों और किसान सम्मेलनों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत

श्री पैकरा की सफलता का असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। गमेकेरा गांव के अन्य किसान, जो अब तक केवल धान के भरोसे थे, वे भी अब ईश्वरचरण के खेत देखने पहुंच रहे हैं। उनकी आर्थिक तरक्की को देखकर गांव के दर्जनों किसानों ने उद्यानिकी विभाग से संपर्क करना शुरू कर दिया है। फूलों की खेती से जुड़ी यह (Floriculture Success Stories) अब एक जन-आंदोलन का रूप ले रही है। किसान अब समझ चुके हैं कि विविधता ही कृषि का भविष्य है।

शासन की योजनाओं का व्यापक असर

राज्य शासन द्वारा उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं अब धरातल पर रंग ला रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य किसानों की आय को दोगुना करना है, और पैकरा जैसे किसान इस लक्ष्य की प्राप्ति में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। फूलों की इन (Floriculture Success Stories) से यह स्पष्ट है कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में एक सकारात्मक क्रांति आ रही है। शासन द्वारा दिए जा रहे अनुदान और तकनीकी सहायता ने किसानों के मन से जोखिम का डर निकाल दिया है।

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