सीजी भास्कर, 22 जून : छत्तीसगढ़ का औद्योगिक जिला कोरबा अब देश और राज्य में शुद्ध एवं सुरक्षित (Food Safety Index) खान-पान के मामले में भी एक बड़ा ब्रांड बनकर उभरा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित कड़े मानकों और गाइडलाइंस का जमीनी स्तर पर बेहतरीन पालन करते हुए कोरबा जिले ने एक बार फिर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। जिले ने बेहतरीन कार्यप्रणाली और फूड क्वालिटी कंट्रोल के दम पर लगातार तीसरी बार छत्तीसगढ़ राज्य के ‘फूड सेफ्टी इंडेक्स’ में पहला स्थान हासिल कर स्वर्णिम हैट्रिक बनाई है।
कोरबा जिले की यह गौरवपूर्ण कामयाबी इसलिए भी बेहद खास और बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि उसने राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे तमाम सर्वसुविधायुक्त और बड़े जिलों को पछाड़कर नंबर वन की गद्दी पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर (National Level) की रैंकिंग में भी कोरबा ने लंबी छलांग लगाई है। जिला पिछले साल के 118वें पायदान से आगे बढ़ते हुए अब देश भर में 112वें स्थान पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है।
जमीनी स्तर पर हुए ये बड़े प्रयास
कोरबा जिले को देश और राज्य में यह मुकाम दिलाने के पीछे खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पूरे साल चलाए गए कड़े अभियान और नियमित मॉनिटरिंग सबसे बड़ी वजह रही है। अधिकारियों ने केवल कागजी आंकड़े दुरुस्त नहीं किए, बल्कि धरातल पर इन बड़े कामों को अंजाम दिया-
नियमित निरीक्षण और छापेमारी : जिले के सभी छोटे-बड़े होटलों, रेस्टोरेंट्स और खाद्य प्रतिष्ठानों का लगातार औचक निरीक्षण किया गया।
क्वालिटी की सतत निगरानी : बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए सैंपलिंग और जांच की रफ्तार को तेज रखा गया।
सुदृढ़ लाइसेंस और पंजीयन प्रक्रिया : व्यापारियों के लिए फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की सरकारी प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और सख्त बनाया गया, जिससे रिकॉर्ड संख्या में व्यापारियों ने पंजीयन कराया।
व्यापक जन-जागरूकता : आम नागरिकों और दुकानदारों को सुरक्षित व हाइजीनिक (स्वच्छ) भोजन के प्रति जागरूक करने के लिए जिले भर में लगातार अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए गए।
कलेक्टर की कमान ने किया कमाल
इस उल्लेखनीय और ऐतिहासिक सफलता में जिला कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन के साथ-साथ जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी विकास भगत एवं संघर्ष कुमार मिश्रा की जमीनी जोड़ी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में विभाग की टीम ने दिन-रात फील्ड पर सक्रिय रहकर प्रभावी कार्रवाइयां कीं और जन-जागरूकता गतिविधियों को एक बड़े आंदोलन का रूप दिया। उनके इसी समर्पण और कड़ी मेहनत की बदौलत आज कोरबा को राष्ट्रीय पटल पर यह नई और विशिष्ट पहचान मिली है, जिसकी चारों तरफ सराहना हो रही है।
इस बड़ी उपलब्धि के बाद जिले में न केवल खाद्य सुरक्षा की सरकारी व्यवस्था को नई मजबूती मिली है, बल्कि आम नागरिकों में भी बाजार में मिलने वाले सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों के प्रति भरोसा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है। कोरबा का यह ‘फूड सेफ्टी मॉडल’ अब छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लिए भी एक मार्गदर्शक और बड़ी प्रेरणा का विषय बन गया है।





