सीजी भास्कर, 16 अप्रैल : गरियाबंद जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा मामला (Gariaband Police Corruption) सामने आया है, जहां एक महिला ने सिटी कोतवाली थाना पुलिस पर पक्षपात और राजनीतिक दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
FIR दर्ज नहीं, आरोपियों को संरक्षण
गरियाबंद में सामने आए मामले (Gariaband Police Corruption) में पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर FIR दर्ज नहीं की और राजनीतिक दबाव में आरोपियों को संरक्षण दिया। इस घटना ने पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
पीड़िता के अनुसार, ग्राम बारूला में होली के दिन 4 मार्च 2026 को उनके ऊपर जानबूझकर हमला किया गया था। लेकिन इस घटना के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। महिला का आरोप है कि यह पूरा मामला (Gariaband Police Corruption) इसलिए दबा दिया गया क्योंकि हमलावर राजनीतिक प्रभाव वाले लोग हैं।
महिला ने जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, उनमें सोहन ध्रुव, जो जनपद अध्यक्ष हैं, और प्रवीण यादव, जो पूर्व जनपद उपाध्यक्ष रह चुके हैं, शामिल हैं। पीड़िता का कहना है कि इन जनप्रतिनिधियों के प्रभाव के कारण पुलिस ने आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।
20 हजार रुपये घूस मांगने का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों ने केस दर्ज करने के बदले 20,000 रुपये की रिश्वत (Gariaband Police Corruption) मांगी। इसमें पहले 10,000 रुपये और बाद में 10,000 रुपये की मांग की गई। इस आरोप के समर्थन में कॉल रिकॉर्डिंग और मेडिकल रिपोर्ट होने का भी दावा किया गया है। महिला ने एसआई अजय सिंह ठाकुर और अन्य पुलिस अधिकारियों पर सीधे तौर पर घूस मांगने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने न्याय की मांग की, तो उनसे पैसे की मांग की गई। पीड़िता का दावा है कि उनके पास इस मामले (Gariaband Police Corruption) से जुड़े कॉल रिकॉर्डिंग और मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूत भी मौजूद हैं, जो आरोपों को मजबूत बनाते हैं।
सीबीआई जांच की मांग, जिले में बढ़ा आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर महिला ने पुलिस अधीक्षक से सीबीआई जांच की मांग की है, ताकि राजनीतिक दबाव के बावजूद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। वहीं, इस घटना (Gariaband Police Corruption) के सामने आने के बाद जिले में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस तरह गरियाबंद में सामने आया मामला (Gariaband Police Corruption) पुलिस की कार्यशैली और राजनीतिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जिस पर आने वाले समय में बड़ा एक्शन देखने को मिल सकता है।


