GDP System Reform में सरकार ने किए बड़े बदलाव — आर्थिक मापदंड होंगे और सटीक
GDP System Reform : देश की अर्थव्यवस्था के बदलते ढांचे को सही ढंग से मापने के लिए सरकार ने GDP प्रणाली में कई अहम संशोधनों पर मुहर लगा दी है। नई सीरीज में ऐसे सुधार जोड़े जा रहे हैं, जो उत्पादन से लेकर आय और वास्तविक व्यय तक, सभी हिस्सों को आधुनिक डेटा सोर्स के हिसाब से अपग्रेड करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले वर्षों की नीतिगत योजना को ज्यादा व्यावहारिक दिशा देगा।
- GDP System Reform में सरकार ने किए बड़े बदलाव — आर्थिक मापदंड होंगे और सटीक
- New GDP Base Year 2022–23 तय — सरकारी आवास से लेकर LLP कंपनियां तक डेटा में बड़ा विस्तार
- Real Sector Data पर आधारित मॉडल — मल्टी-एक्टिविटी कंपनियों का आउटपुट होगा अधिक सटीक
- छोटे व्यवसायों और मजदूर वर्ग की वास्तविक स्थिति को पकड़ने के लिए नए सर्वे का सहारा
- फाइनेंशियल सेक्टर के लिए नई व्यवस्था — बैंकिंग, NBFC और बीमा एजेंसी का डेटा सीधे शामिल होगा
- सरकारी पेंशन पर भी नया मॉडल — पुरानी और नई पेंशन प्रणाली का स्पष्ट अंतर दिखेगा
- स्थानीय निकाय, स्वायत्त संस्थाएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए पैरामीटर शामिल
- विशेषज्ञों से 10 दिसंबर तक मांगे सुझाव — 27 फरवरी 2026 को जारी होगी नई रेंज
New GDP Base Year 2022–23 तय — सरकारी आवास से लेकर LLP कंपनियां तक डेटा में बड़ा विस्तार
नई सीरीज का बेस ईयर 2022–23 रखा गया है। इसमें सरकारी आवासों की कीमतों का नया अनुमान, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) कंपनियों को शामिल करना और माइनिंग व फाइनेंशियल सेवाओं के लिए अलग-अलग डिफ्लेटर तैयार करना शामिल है। इससे पहले ये हिस्से एक संयुक्त अनुमान पर चलते थे, जो अब बदलकर सीधे डेटा-आधारित मॉडल पर पहुंचेगा।
Real Sector Data पर आधारित मॉडल — मल्टी-एक्टिविटी कंपनियों का आउटपुट होगा अधिक सटीक
स्टैटिस्टिक्स विभाग ने स्पष्ट किया कि अब नॉन-फाइनेंशियल प्राइवेट कॉर्पोरेट सेक्टर का अनुमान किसी एक कारोबारी श्रेणी से नहीं जोड़ा जाएगा। कंपनी फाइलिंग में किस गतिविधि से कितनी आय हुई, इसका सेगमेंट-वाइज आउटपुट तैयार किया जाएगा। इससे उत्पादन (Production Approach) और मूल्य संवर्धन दोनों में सटीकता बढ़ेगी।
छोटे व्यवसायों और मजदूर वर्ग की वास्तविक स्थिति को पकड़ने के लिए नए सर्वे का सहारा
अनरजिस्टर्ड सेक्टर की ग्रोथ अब 10 साल पुराने पैटर्न पर नहीं, बल्कि ताज़ा वार्षिक सर्वे डेटा पर आधारित होगी। इसके लिए छोटे कारोबारियों, दुकानों और सेमी-फॉर्मल गतिविधियों पर PLFS और Annual Establishment Surveys का उपयोग किया जाएगा। इससे सेवा और निर्माण क्षेत्र की ग्रोथ को लेकर पूर्वानुमान कहीं अधिक विश्वसनीय होंगे।
फाइनेंशियल सेक्टर के लिए नई व्यवस्था — बैंकिंग, NBFC और बीमा एजेंसी का डेटा सीधे शामिल होगा
बैंकिंग सिस्टम के लिए अब रियल-टाइम रिपोर्टिंग का उपयोग किया जाएगा। प्राइवेट NBFC के लिए कॉर्पोरेट मामलों से प्राप्त डेटा, और बीमा एजेंटों व साहूकारों के लिए विशेष सर्वेक्षण शामिल किया जाएगा। यह सुधार Financial Deepening की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में सहायक माना जा रहा है।
सरकारी पेंशन पर भी नया मॉडल — पुरानी और नई पेंशन प्रणाली का स्पष्ट अंतर दिखेगा
पेंशन सेक्टर में नए तरीके से गणना की जाएगी, जिसमें पुराने पेंशन ढांचे से NPS में हुए बदलाव को स्पष्ट रूप से दिखाने की योजना है। इससे सरकारी व्यय और भविष्य में पेंशन दायित्व का आकलन पहले की तुलना में ज्यादा सहज होगा।
स्थानीय निकाय, स्वायत्त संस्थाएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए पैरामीटर शामिल
नई GDP सीरीज में स्थानीय निकायों, ग्राम-स्तरीय संस्थाओं और स्वायत्त संगठनों की आर्थिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
समुद्री व मीठे पानी की मछली-पालन, पशु चारे का उत्पादन और घरों की मरम्मत-रखरखाव जैसे क्षेत्रों के लिए नए आर्थिक अनुपात तैयार किए गए हैं, जो पहले के अनुमान में मौजूद नहीं थे।
विशेषज्ञों से 10 दिसंबर तक मांगे सुझाव — 27 फरवरी 2026 को जारी होगी नई रेंज
सरकार ने सभी विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी समूहों से 10 दिसंबर तक सुझाव मांगे हैं। नई GDP सीरीज की औपचारिक घोषणा 27 फरवरी 2026 को की जाएगी, जो भारत की आर्थिक दिशा के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन माना जा रहा है।



