सीजी भास्कर, 23 जून : केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन (George Kurian Resignation) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसे केंद्र सरकार और भाजपा संगठन के भीतर महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
George Kurian Resignation के साथ केंद्र सरकार में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव दर्ज किया गया है। राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया। वे मोदी सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और केरल भाजपा का एक महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते हैं।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने का असर
21 जून 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद जॉर्ज कुरियन को दोबारा सदन में भेजे जाने का अवसर नहीं मिला। संवैधानिक और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद लिया फैसला
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनावों में उन्हें पुनः नामांकन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर उनके त्यागपत्र को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय राज्यसभा में उनकी सदस्यता समाप्त होने के बाद स्वाभाविक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि इससे केरल भाजपा की राजनीति और केंद्र में दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
केंद्र सरकार में निभाईं अहम जिम्मेदारियां
जॉर्ज कुरियन केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, मत्स्य क्षेत्र के विकास तथा डेयरी उद्योग से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई।
वे भाजपा के उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार में योगदान दिया। मोदी सरकार में उनकी नियुक्ति को ईसाई समुदाय तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देखा गया था।
वकालत से राजनीति तक का लंबा सफर
20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले में जन्मे जॉर्ज कुरियन ने कानून की शिक्षा प्राप्त की और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक जीवन में कदम रखा।
वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। जून 2024 में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी।
आगे क्या हो सकता है?
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में उनके विभागों की जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और संभावित मंत्रिमंडलीय फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल किसी नए नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
उल्लेखनीय है कि उनके साथ राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल पूरा करने वाले रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल भी समाप्त हुआ है, लेकिन वे फिलहाल केंद्रीय मंत्री पद पर बने हुए हैं।





