सीजी भास्कर, 27 दिसंबर। ग्राफ्टेड टमाटर (Grafted Tomato) की खेती से युवराज साहू को अब दोगुना फायदा हो रहा है। टमाटर की ग्राफ्टिंग पौधों की पैदावार (उत्पादन) बढ़ाने और जड़ प्रणाली (Root System) से जुड़ी बीमारियों और विकारों के खतरे को कम करने का बेहतरीन तरीका है। इससे पौधों की मजबूती (Plant Strength) बढ़ती है, पैदावार अधिक होती है और जड़ों के ऊपरी हिस्से के गलने की समस्या समाप्त हो जाती है। बलौदाबाज़ार-भाटापारा जिले में इस ग्राफ्टेड तकनीक से सब्जियों की खेती (Vegetable Farming) में शानदार परिणाम देखने को मिल रहे हैं। भाटापारा ब्लॉक के कृषक युवराज साहू ने इस विधि से एक सीजन में करीब 3 लाख रुपए प्रति एकड़ की शुद्ध लाभ प्राप्त किया है।
कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन
युवराज साहू ने बताया कि पहले वे परंपरागत तरीके से टमाटर (Tomato) की खेती करते थे, जिसमें पौधों के सूखने और रोग (Disease) की समस्या होती थी, जिससे काफी नुकसान होता था। उद्यानिकी विभाग (Horticulture Department) द्वारा किसानों को नई तकनीक से जोड़ने और उत्पादन बढ़ाने की पहल सफल साबित हो रही है। ग्राफ्टेड टमाटर में रोगों का प्रकोप सामान्य खेती की तुलना में कम देखा गया है। तीनों सीजन (Seasons) में उत्पादन प्राप्त होता है। कम पानी और मजदूरी लागत भी कम आती है। मजबूत पौधों (Strong Plants) की वजह से उत्पादन में सुधार हुआ और किसानों को आर्थिक रूप से लाभ मिल रहा है।
साल में 2 से 3 बार उत्पादन
युवराज साहू ने कहा कि ग्राफ्टेड विधि से उगने वाली टमाटर की खेती साल में 2 से 3 बार (2-3 Harvests per Year) की जा सकती है। यह टमाटर सामान्य टमाटर (Regular Tomato) की तरह है, जिसका इस्तेमाल सब्जियों में अधिक होता है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत किसानों को उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रति प्रदर्शन 30,000 रुपए का अनुदान दिया जा रहा है। विभाग ने जिले के 188 किसानों का चयन कर उन्हें इस योजना का लाभ दिया है।


