सीजी भास्कर, 22 मई : दुर्ग शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थानों में शामिल जेआरडी मल्टीपरपस स्कूल (Heritage School Development) के संरक्षण और आधुनिकीकरण को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने गुरुवार को दुर्ग गांधी चौक स्थित इस ऐतिहासिक विद्यालय का अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया और विद्यालय की वर्तमान स्थिति, संरक्षण योजना तथा विकास कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा की। शहर की कई पीढ़ियों की भावनाओं और स्मृतियों से जुड़े इस विद्यालय को अब नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने विद्यालय भवन की जर्जर हो चुकी स्थिति का अवलोकन किया। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्कूल की ऐतिहासिक संरचना और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए। सरकार की प्राथमिकता है कि विद्यालय की विरासत बनी रहे और साथ ही विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली का लाभ भी मिल सके। इसी सोच के साथ पुराने शैक्षणिक संस्थानों के संरक्षण और उन्नयन की दिशा में (Heritage School Development) कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
विद्यालय परिसर में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, प्रयोगशालाओं के उन्नयन, पुस्तकालय विस्तार और अन्य अधोसंरचना विकास को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि छात्रों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी संसाधनों का विस्तार किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि पुराने सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की यह पहल शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देगी।
निरीक्षण के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर भी विशेष चर्चा की गई। NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए “सुपर-30” योजना शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को विशेष कोचिंग, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे दुर्ग और आसपास के विद्यार्थियों को बड़े शहरों की तरह गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर अपने ही क्षेत्र में मिल सकेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने में मददगार साबित होगी।

मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उनका कहना था कि प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य देने के उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों का उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, स्मार्ट क्लास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी सुविधाएं अब सरकारी विद्यालयों में भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच अवसरों का अंतर कम किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक विद्यालय केवल भवन नहीं होते, बल्कि वे समाज की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे संस्थानों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। इसी उद्देश्य के तहत (Heritage School Development) मॉडल को आगे बढ़ाते हुए पुराने स्कूलों को आधुनिक स्वरूप देने का कार्य किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों और पूर्व विद्यार्थियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि जेआरडी मल्टीपरपस स्कूल केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं बल्कि दुर्ग शहर की पहचान रहा है। ऐसे में इसके संरक्षण और विकास की पहल शहर के लिए गौरव की बात है। आने वाले समय में यह विद्यालय आधुनिक शिक्षा सुविधाओं और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा उदाहरण बन सकता है।



