सीजी भास्कर, 17 मई। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के बाघमारा क्षेत्र में देश की चौथी बड़ी गोल्ड माइंस विकसित होने जा रही है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद यहां वेदांता ग्रुप ने डीप ड्रिलिंग और एक्सप्लोरेशन का काम शुरू कर दिया है। (Huge gold reserves found in Chhattisgarh)
शुरुआती जांच में करीब 2700 किलो सोने के भंडार की पुष्टि हुई है। माना जा रहा है कि अगले दो वर्षों में यहां खनन कार्य शुरू हो सकता है।
500 मीटर तक ड्रिलिंग, 603 हेक्टेयर में फैला क्षेत्र : Huge gold reserves found in Chhattisgarh
बाघमारा की पहाड़ियों और जंगलों के बीच करीब 603 हेक्टेयर क्षेत्र में सोने के भंडार का पता चला है। यहां 500 मीटर तक ड्रिलिंग की जा रही है और 50 से अधिक ड्रिलिंग होल्स से सैंपल लेकर लैब भेजे जा रहे हैं। इन सैंपलों के जरिए सोने की गुणवत्ता, गहराई और भंडार के विस्तार का सटीक आंकलन किया जा रहा है।
ड्रिलिंग के दौरान निकले पत्थरों में सोने के महीन चमकदार कण दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती अनुमान से अधिक मात्रा में भी सोना मिल सकता है। बताया जा रहा है कि करीब 500 किलो सोना ऊपरी हिस्से में मौजूद हो सकता है।
देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
भारत में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, लेकिन घरेलू उत्पादन बेहद कम है। देश अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत सोना आयात करता है। ऐसे में बाघमारा की यह गोल्ड माइंस विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस परियोजना से सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलेगा। हालांकि यह प्रोजेक्ट (Huge gold reserves found in Chhattisgarh) करीब 10 साल देरी से आगे बढ़ पाया है। फॉरेस्ट क्लियरेंस और एनजीटी में लंबित मामलों के कारण काम रुका हुआ था, लेकिन अब सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
देश में गिनी-चुनी सक्रिय गोल्ड माइंस : Huge gold reserves found in Chhattisgarh
देश में फिलहाल कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइंस प्रमुख सक्रिय स्वर्ण खदान है, जबकि कोलार गोल्ड फील्ड्स लंबे समय से बंद पड़ी है। इसके अलावा उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भी एक्सप्लोरेशन का काम जारी है।
खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघमारा परियोजना राज्य और देश दोनों की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। एक्सप्लोरेशन पूरा होने के बाद माइनिंग की अंतिम अनुमति दी जाएगी।



