सीजी भास्कर, 09 जुलाई। भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने (India New Zealand FTA) जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद होने वाली प्रधानमंत्री स्तर की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। दौरे से पहले हुए अहम व्यापार समझौते ने कारोबारी जगत का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को आर्थिक रिश्तों के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल व्यापार आसान होगा, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और निर्यातकों को भी नए अवसर मिलेंगे।
चार दशक बाद न्यूजीलैंड जाएंगे प्रधानमंत्री India New Zealand FTA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर न्यूजीलैंड जाएंगे। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
57 प्रतिशत निर्यात पर नहीं लगेगा टैरिफ
यात्रा से पहले भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बताया कि समझौते के लागू होते ही उनके देश के 57 प्रतिशत उत्पाद भारतीय बाजार में बिना टैरिफ के पहुंच सकेंगे। इससे वहां के किसानों, उद्योगों और कारोबारियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारतीय निर्यातकों को भी मिलेगा फायदा
यह समझौता भारत के लिए भी लाभकारी माना जा रहा है। इसके तहत भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले अधिकांश उत्पादों को भी ड्यूटी फ्री प्रवेश (India New Zealand FTA) मिलेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को नए बाजार मिलेंगे और प्रशांत क्षेत्र में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
ऑकलैंड में होगी अहम बैठक
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
उद्योग जगत और भारतीय समुदाय से भी करेंगे संवाद
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान न्यूजीलैंड के प्रमुख उद्योगपतियों, निवेशकों और खेल जगत की हस्तियों से मुलाकात करेंगे। साथ ही भारतीय समुदाय को भी संबोधित (India New Zealand FTA) करेंगे। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।



