सीजी भास्कर, 17 अप्रैल : ग्रामीण विकास की तस्वीर बदलने (Integrated Farming Success) में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) अब सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन चुका है। अरौद डुबान क्षेत्र के ग्राम कलारबाहरा निवासी सगनू राम इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं। सीमित संसाधनों और वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहने वाले सगनू राम ने आज बहुआयामी खेती के जरिए नई पहचान बनाई है। उनकी सफलता अब बहुआयामी खेती मॉडल के रूप में सामने आई है।
सगनू राम पहले केवल एक फसल पर निर्भर थे, जिससे उनकी आय अनिश्चित बनी रहती थी। सिंचाई के अभाव में खेती पूरी तरह बारिश पर टिकी थी, लेकिन मनरेगा योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत में डबरी निर्माण के लिए आवेदन किया। वर्ष 2023-24 में लगभग 2.98 लाख रुपये की लागत से 25×25 मीटर की डबरी तैयार हुई, जिसने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी। यह पहल मनरेगा डबरी योजना (Integrated Farming Success) के सफल उपयोग का उदाहरण बन गई।
डबरी बनने के बाद सगनू राम को स्थायी जल स्रोत मिल गया, जिससे वे नियमित सिंचाई करने लगे। अब 2 एकड़ में धान की खेती में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ी हैं। इसके साथ ही उन्होंने कृषि विभाग के सहयोग से 1.5 एकड़ में माड़िया (रागी) की खेती शुरू की, जिससे उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। यह बदलाव उन्नत कृषि मॉडल (Integrated Farming Success) की ताकत को दर्शाता है।
सगनू राम ने आय बढ़ाने के लिए डबरी में मछली पालन भी शुरू किया, जिससे उन्हें करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इस तरह जल संरक्षण, बहुफसली खेती और मछली पालन को जोड़कर उन्होंने एक मजबूत आजीविका मॉडल तैयार किया। अब वे फसल चक्र, जैविक खाद और जल प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को और बेहतर बना रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया टिकाऊ खेती प्रणाली (Integrated Farming Success) की दिशा में बड़ा कदम है।
आज सगनू राम आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता को देखकर कई ग्रामीण मनरेगा के तहत डबरी निर्माण और आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही योजना, मेहनत और नवाचार के जरिए सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।


