सीजी भास्कर28 जनवरी IPS Promotion Dispute Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे के भीतर पदोन्नति को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। 2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी और कवर्धा के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर पदोन्नति प्रक्रिया में भेदभाव और अन्याय का आरोप लगाया है। अधिकारी का कहना है कि नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर पदोन्नति से दूर रखा गया।
बार-बार सूची में नाम, फिर भी पदोन्नति नहीं
अपने पत्र में आईपीएस अधिकारी ने उल्लेख किया है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी कई पदोन्नति सूचियों—10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025—में उनके नाम पर विचार तो किया गया, लेकिन अंतिम समय में उन्हें बाहर कर दिया गया। कारण के तौर पर लोकायुक्त, भोपाल में लंबित जांच का हवाला दिया गया।
गंभीर आरोप वाले अधिकारी हुए प्रमोट
अधिकारी ने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि जिन अधिकारियों पर उनसे कहीं अधिक गंभीर आरोप हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज हैं और जिन मामलों में न्यायालय से अंतिम रिपोर्ट तक नहीं आई है, उन्हें पदोन्नति का लाभ कैसे दे दिया गया। (Promotion Discrimination) के इस उदाहरण ने प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चार्जशीट नहीं, फिर भी रोकी गई तरक्की
आईपीएस छवई ने स्पष्ट किया है कि उनके विरुद्ध न तो कोई चार्जशीट दाखिल हुई है, न ही वे निलंबित हैं और न ही किसी न्यायालय में आपराधिक मामला लंबित है। इसके बावजूद उन्हें वरिष्ठ वेतनमान और उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) पद की पदोन्नति से वंचित रखा गया।
केंद्र सरकार के नियमों का हवाला
पत्र में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया गया है। इन नियमों के अनुसार, यदि अधिकारी पर कोई औपचारिक आरोप या न्यायिक कार्यवाही लंबित नहीं है, तो उसे पदोन्नति से रोका नहीं जा सकता। अधिकारी का आरोप है कि इन नियमों की अनदेखी की गई।
संविधान के समानता अधिकार का सवाल
आईपीएस अधिकारी ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया है। उन्होंने लिखा है कि समान परिस्थितियों में कार्यरत अन्य अधिकारियों को पदोन्नत किया गया, जबकि उनके साथ अलग व्यवहार किया गया, जिससे उनका मनोबल गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
पुलिस महकमे में उठे पारदर्शिता के प्रश्न
इस पत्र के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के अगले कदम पर है—क्या इस मामले की निष्पक्ष समीक्षा होगी, या मामला यूं ही लंबित रहेगा।


