सीजी भास्कर, 25 अगस्त : गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है। जिले की 171 पंचायतों में से अब तक 160 पंचायतों में जीवामृत के उपयोग से मॉडल किसान फार्म तैयार किए जा चुके हैं। इन फार्मों का भ्रमण कराकर आसपास और अन्य गांवों के किसानों को जैविक खेती के फायदे बताए जा रहे हैं।
जीवामृत के उपयोग पर किसानों को दिया प्रशिक्षण
गौरेला विकासखंड में जीवामृत के उपयोग और जैविक खेती को लेकर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण में किसानों को जीवामृत तैयार करने और उसके उपयोग, मृदा परीक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जैविक खेती और उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने के तरीकों से भी अवगत कराया गया।
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किसान के खेत में दिखा जीवामृत का असर
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गौरेला के किसान बृजलाल राठौर के फार्म का भ्रमण कराया गया। यहां म्यूटेंट विष्णुभोग धान की फसल में जीवामृत का उपयोग किया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार महज 22 दिन की फसल में सुगंध आने के साथ बेहतर वृद्धि देखी गई। इस दौरान फसल में कीट और बीमारी का प्रकोप भी नहीं पाया गया। खेत में फसल की स्थिति देखकर किसानों ने जीवामृत के इस्तेमाल के सकारात्मक परिणामों को करीब से समझा।
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160 पंचायतों में मॉडल फार्म, किसानों में बढ़ी रुचि
जीपीएम की 160 पंचायतों में तैयार किए गए जीवामृत मॉडल फार्म (Jeevamrit Model Farm) को जैविक खेती की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन खेतों का भ्रमण कराकर किसानों को जैविक खेती की तकनीकों और जीवामृत के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव दिया जा रहा है।
किसानों ने मॉडल फार्म में फसल की स्थिति और जीवामृत के उपयोग से मिले परिणामों को देखकर जैविक खेती अपनाने में रुचि दिखाई है। कृषि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती की पद्धतियों से जुड़ें और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।





