सीजी भास्कर, 30 जून। चर्चित नौगई तिहरे हत्याकांड को लेकर (Karni Sena Protest) के बीच करणी सेना ने प्रदेश सरकार पर दबाव और तेज कर दिया है। सोमवार को करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत बैकुंठपुर पहुंचे, जहां उन्होंने मृतक भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह की तेरहवीं में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखने का भरोसा दिलाया।
पीड़ित परिवार से चर्चा के बाद डॉ. राज शेखावत ने कहा कि घटना के बाद भी परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार संतोषजनक नहीं है और पीड़ित परिवार स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि (Karni Sena Protest) का उद्देश्य किसी प्रकार की राजनीति नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को निष्पक्ष न्याय दिलाना है। इस दौरान करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर, संगठन के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
डॉ. शेखावत ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में गंभीर आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने नौगई तिहरे हत्याकांड की CBI अथवा उच्चस्तरीय SIT से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पुलिस अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन केवल इतनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। जिन 25 से 26 लोगों के नाम इस मामले में सामने आए हैं, उनके विरुद्ध भी निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी से लोगों का विश्वास कमजोर होता है और जनाक्रोश बढ़ने की आशंका रहती है।
करणी सेना ने घोषणा की है कि 19 जुलाई को नौगई में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसमें समाज के बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर मृतकों को श्रद्धांजलि देंगे और न्याय की मांग को और मजबूत करेंगे। संगठन ने स्पष्ट किया कि (Karni Sena Protest) तब तक जारी रहेगा, जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता और सभी दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती।



