सीजी भास्कर, 06 अगस्त : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ कपास (Cotton Farming) जैसी नकदी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन और कृषि विभाग के प्रयासों से भाटापारा विकासखंड में अब तक 25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बोनी की जा चुकी है। विभाग का मानना है कि फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ने के साथ भूजल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती
कृषि विभाग के अनुसार भाटापारा विकासखंड के ग्राम गुड़ेलिया, कोनी, बिटकुली, तुरमा और अवरेठी में किसानों ने कपास (Cotton Farming) की उन्नत खेती शुरू की है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की लगातार जागरूकता और तकनीकी मार्गदर्शन के कारण किसान धान के विकल्प के रूप में कपास जैसी नकदी फसल को अपना रहे हैं।
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कम पानी में अधिक लाभ की उम्मीद Cotton Farming
अधिकारियों ने बताया कि धान की तुलना में कपास की फसल को लगभग 70 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता होती है। इससे गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही लगातार धान की खेती से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि कपास की खेती से भूमि की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और कीट व रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है।
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कृषक उन्नति योजना के तहत मिलेगा प्रोत्साहन
राज्य शासन किसानों (Cotton Farming) को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रहा है। कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर अन्य फसल अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं धान के अलावा अन्य फसल लगाने पर 10 हजार रुपये की आदान सहायता भी मिलेगी। इस राशि का उपयोग किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों में कर सकेंगे।
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अन्य गांवों में भी चलेगा जागरूकता अभियान
कृषि विभाग ने बताया कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए अन्य गांवों में भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। विभाग का उद्देश्य किसानों को कम लागत और कम पानी वाली फसलों की ओर प्रेरित करना है, ताकि खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके।
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