सीजी भास्कर, 20 सितंबर : झीरम घाटी (Jhiram Case Political Dispute) मामले में NIA अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस नेताओं पर मामले को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार किया। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब 16 सितंबर को विशेष NIA अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था।
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साव बोले- सच था तो जांच में क्यों नहीं आया
अरुण साव ने भूपेश बघेल के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि उनके पास झीरम का सच होने का दावा था, तो जांच के दौरान वह सामने क्यों नहीं आया। साव ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को मामले से जुड़े तथ्य या सबूत मालूम थे तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखना चाहिए था।
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साव के बयान के अनुसार, झीरम मामले पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप (Jhiram Case Political Dispute) के बजाय जांच एजेंसियों के सामने उपलब्ध जानकारी रखी जानी चाहिए थी। उन्होंने NIA की जांच और अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी निशाना साधा।
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भूपेश बोले- हमने अपने बड़े नेताओं को खोया
अरुण साव के बयान पर भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम हमले में कांग्रेस ने अपने कई बड़े नेताओं को खोया है। उन्होंने साव के परिवार के किसी सदस्य की ऐसी हत्या नहीं होने का हवाला देते हुए कहा कि शायद उन्हें इस घटना का दर्द और एहसास नहीं हो सकता। यह बयान साव के कथन के जवाब में सामने आया। बघेल ने अदालत के फैसले के बाद भी मामले की कथित बड़ी साजिश से जुड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि उनकी नजर में जांच पूरी नहीं हुई है और जिन लोगों को वे कथित मुख्य साजिशकर्ता मानते हैं, उनके बारे में सवाल बाकी हैं। ये बघेल के राजनीतिक दावे हैं।
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2013 के हमले में मारे गए थे 27 लोग
25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। NIA की विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और 16 सितंबर को सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया। NIA के अनुसार मामले में अदालत ने 10 आरोपियों को सजा सुनाई है। वहीं रिपोर्टों के मुताबिक मामले में अन्य आरोपी अब भी वांछित हैं।
कवासी लखमा को लेकर भी उठे सवाल
झीरम मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। साव ने कहा कि NIA ने मामले की जांच की है और बड़ी संख्या में लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक रिकॉर्ड और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही तय होता है। वहीं कांग्रेस की ओर से अदालत के फैसले के बाद जांच के दायरे को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मामले में कथित बड़ी साजिश की भी जांच होनी चाहिए। इन दावों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के बीच मतभेद हैं।
फैसले के बाद भी जारी है सियासी बहस
NIA अदालत के फैसले के बाद झीरम मामले का राजनीतिक और कानूनी पक्ष एक बार फिर चर्चा में है। अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड दिया है, जबकि फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से जांच के दायरे और कथित साजिश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने अदालत के फैसले और NIA की जांच को लेकर कांग्रेस की आलोचना की है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील और सजा की पुष्टि से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया होनी है।
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