नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों के बह जाने की खबर है। बाढ़ के पानी के साथ बहकर कई शव दक्षिण-मध्य नेपाल के चितवन जिले तक पहुंच गए हैं। अधिकारियों के सामने शवों की पहचान और सुरक्षित तरीके से अंतिम निपटान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
चितवन में बड़ी संख्या में शव बरामद
भारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद चितवन में करीब 250 शव पहचान के इंतजार में पड़े थे। शवों की बढ़ती संख्या और गर्मी व नमी के कारण उनके तेजी से खराब होने की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने अस्थायी रूप से दफनाने का फैसला किया। शनिवार को करीब 100 शवों को अस्थायी कब्रों में दफनाया गया।
बताया गया कि भोटेकोशी नदी के तेज बहाव में शव बाढ़ प्रभावित इलाकों से दूर तक बह गए और बाद में चितवन में बरामद हुए। फोरेंसिक टीमों पर भी शवों की पहचान करने का भारी दबाव है।
शवों के खराब होने से बढ़ी चिंता
अधिक तापमान और नमी के कारण शव तेजी से सड़ने लगे, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गईं। विशेषज्ञों ने शवों को लंबे समय तक खुले में रखने से संक्रमण और बीमारी फैलने के खतरे की चेतावनी दी है। इसी वजह से प्रशासन के सामने जल्द कार्रवाई करने का दबाव बना हुआ है।
वहीं, राहत और शवों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भी सड़क बंद होने से परेशानी आ रही है। भूस्खलन के कारण काठमांडू और चितवन को जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग फिर से बंद हो गया, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुए हैं।
परिजनों की सहमति के बिना अंतिम संस्कार पर आपत्ति
लापता लोगों के परिजनों ने शवों को उनकी पहचान और परिवार की सहमति के बिना दफनाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार का अवसर परिवार को मिलना चाहिए।
पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने भी अज्ञात शवों के निपटान को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खोज एवं बचाव अभियान पूरा होने और लापता लोगों के परिवारों से बातचीत किए बिना शवों का अंतिम निपटान करना उचित नहीं है।
नेपाल में जारी इस प्राकृतिक आपदा के बीच प्रशासन के सामने एक ओर राहत और बचाव अभियान को तेज करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर बरामद शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की गंभीर जिम्मेदारी भी बनी हुई है।




