सीजी भास्कर, 21 अप्रैल : उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में आस्था का महासंगम अपने चरम पर पहुंच चुका है। बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने से ठीक पहले श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। देशभर से आए भक्तों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस पावन मौके पर पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है और हर ओर “बम-बम भोले” के जयकारे गूंज रहे हैं। यह भव्य दृश्य (Kedarnath Yatra 2026) की दिव्यता को और भी खास बना रहा है।
ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ की यात्रा अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली अब केदारपुरी के बेहद करीब पहुंच चुकी है। आर्मी बैंड की मधुर धुन और मंत्रोच्चार के बीच यह यात्रा श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत संगम बन गई है। केदारनाथ धाम को फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है, जिससे यह (Kedarnath Yatra 2026) और भी आकर्षक बन गई है।
फाटा से गौरीकुण्ड तक उमड़ा भक्ति का सैलाब
बाबा केदारनाथ की डोली फाटा से अपने सफर पर रवाना हुई और बड़ासू, शेरसी, रामपुर, सीतापुर होते हुए शाम को गौरीकुण्ड पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और अक्षत के साथ बाबा की डोली का भव्य स्वागत किया। सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुण्ड तक हर जगह भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यह पूरा दृश्य (Kedarnath Yatra 2026) की भव्यता को दर्शाता है।
सोमवार रात बाबा की डोली ने गौरी माई मंदिर में विश्राम किया। इससे पहले डोली ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होकर गुप्तकाशी पहुंची थी, जहां आर्मी बैंड ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। यह यात्रा (Kedarnath Yatra 2026) का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
आज शाम धाम पहुंचेंगे बाबा, कल होगा महाअभिषेक
मंगलवार सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद डोली गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो चुकी है। हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए डोली के पीछे-पीछे चल रहे हैं। उम्मीद है कि शाम तक डोली मंदिर परिसर पहुंच जाएगी। इसके बाद कल सुबह 8 बजे मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ कपाट खोले जाएंगे। यह ऐतिहासिक क्षण (Kedarnath Yatra 2026) का सबसे महत्वपूर्ण पल होगा, जिसका इंतजार लाखों भक्त कर रहे हैं।
पैदल मार्ग पर भारी जाम और अव्यवस्था
आस्था के इस महाकुंभ में जहां उत्साह चरम पर है, वहीं व्यवस्थाओं की पोल भी खुलती नजर आ रही है। गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक के संकरे पैदल मार्ग पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हजारों यात्रियों के एक साथ आगे बढ़ने के कारण जगह-जगह जाम की स्थिति बन गई है। इस स्थिति ने (Kedarnath Yatra 2026) के दौरान यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सबसे बड़ी समस्या घोड़े-खच्चरों की बेतरतीब आवाजाही बन गई है। संकरे रास्तों पर इनके कारण पैदल यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। यात्रियों का कहना है कि पशुओं के दबाव के कारण जाम खुल नहीं रहा है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस अव्यवस्था ने (Kedarnath Yatra 2026) के प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केदारघाटी हुई शिवमय
कठिन रास्तों और भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। केदारघाटी पूरी तरह शिवमय नजर आ रही है। गुप्तकाशी से लेकर गौरीकुण्ड तक हर तरफ भक्ति का रंग छाया हुआ है। लोग कठिनाइयों के बावजूद बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ते जा रहे हैं। यही अटूट आस्था (Kedarnath Yatra 2026) की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।


