सीजी भास्कर, 15 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के युवा शोधकर्ता और लेखक कमल दास महंत के वैज्ञानिक कार्य ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधुनिक भौतिकी के क्षेत्र में नई बहस को जन्म (KEUFT Physics Theory) दिया है। उनके द्वारा प्रस्तुत Kamal–Einstein Unified Field Theory (KEUFT) को लेकर वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में रुचि बढ़ती नजर आ रही है। यह सिद्धांत आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण E = mc² की एक संशोधित व्याख्या पेश करता है और ब्रह्मांड की मूल संरचना को नए नजरिये से समझाने का दावा करता है।
कमल दास महंत के अनुसार, KEUFT यह मानता है कि स्पेस पूरी तरह शून्य नहीं है, बल्कि उसमें ऊर्जा एक निष्क्रिय अवस्था में मौजूद रहती है। यही निष्क्रिय ऊर्जा पृथ्वी के कोर, अंतरिक्षीय संरचनाओं और ब्लैक होल जैसी जटिल ब्रह्मांडीय घटनाओं को समझने में अहम भूमिका निभाती है। यह अवधारणा पारंपरिक भौतिकी की कई स्थापित धारणाओं को पुनः परिभाषित करने का प्रयास करती है।
KEUFT से जुड़े शोध पत्र और गणितीय ढांचा अंतरराष्ट्रीय ओपन-एक्सेस प्लेटफॉर्म Zenodo पर प्रकाशित किए (KEUFT Physics Theory) जा चुके हैं। प्रकाशन के बाद अल्प समय में ही इन शोध दस्तावेजों को सैकड़ों बार देखा और डाउनलोड किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह सिद्धांत वैश्विक वैज्ञानिक संवाद का हिस्सा बनता जा रहा है।
कमल दास महंत का कहना है कि KEUFT केवल एक वैचारिक प्रयोग नहीं है, बल्कि यह ग्रैविटी, स्पेस-टाइम, एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन और ब्लैक होल फिजिक्स को एकीकृत रूप में समझाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इसी सिद्धांत पर आधारित उनकी पुस्तक “E:mc² Modified: The Kamal–Einstein Unified Field Theory” हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुई है, जिसे शोध और अकादमिक जगत में गंभीरता से देखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में मौलिक वैज्ञानिक शोध की अपार संभावनाएँ (KEUFT Physics Theory) मौजूद हैं। जरूरत इस बात की है कि स्वदेशी वैज्ञानिक विचारों को वैश्विक मंच पर खुलकर प्रस्तुत किया जाए और उन पर सार्थक विमर्श हो।
वैज्ञानिक हलकों में यह माना जा रहा है कि KEUFT आने वाले समय में शोध, अकादमिक चर्चाओं और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, साथ ही आधुनिक भौतिकी में नए रास्ते खोलने की क्षमता भी रखता है।


