सीजी भास्कर, 30 अप्रैल : एसईसीएल की मेगा परियोजना कुसमुंडा कोयला खदान (Kusmunda Mine Accident) में बुधवार को एक भयावह घटना घटी, जिसने खदान सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खदान में कोयला परिवहन के कार्य में तैनात लगभग 100 टन क्षमता वाले एक भारी-भरकम डंपर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करोड़ों रुपये की मशीन जलकर खाक हो गई।
ऑपरेटर की सूझबूझ से टली जनहानि
इस कुसमुंडा खदान हादसा (Kusmunda Mine Accident) के दौरान सबसे राहत की बात यह रही कि डंपर चला रहे ऑपरेटर ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही ऑपरेटर को वाहन से धुआं उठता दिखाई दिया, उसने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल डंपर रोका और नीचे कूद गया। यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो यह एक बड़ी जनहानि में बदल सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि चालक को संभलने का बहुत कम समय मिला।
करोड़ों का नुकसान और प्रबंधन की विफलता
आग की लपटें इतनी तीव्र थीं कि खदान परिसर में काफी दूर तक धुएं का गुबार देखा गया। एसईसीएल प्रबंधन और सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती संसाधन नाकाफी साबित हुए। बाद में दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक लगभग 5 करोड़ रुपये की मशीन कबाड़ में तब्दील हो चुकी थी। इस कुसमुंडा खदान हादसा (Kusmunda Mine Accident) ने एक बार फिर खदानों में उपलब्ध त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (Quick Response System) की पोल खोल दी है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठते सवाल
घटना के बाद यह बात सामने आई है कि आग लगने के शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में मौके पर पर्याप्त अग्निशमन संसाधन मौजूद नहीं थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी खदानों में जहाँ भारी मशीनों का उपयोग होता है, वहाँ तकनीकी निगरानी और आपदा प्रबंधन तंत्र का हर समय सक्रिय रहना अनिवार्य है। इस कुसमुंडा खदान हादसा (Kusmunda Mine Accident) की जांच के लिए प्रबंधन ने आंतरिक निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसमें तकनीकी खराबी, ईंधन प्रणाली और वायरिंग की जांच की जाएगी।
बार-बार होती लापरवाही
महत्वपूर्ण है कि कुसमुंडा, गेवरा और दीपका जैसी बड़ी परियोजनाओं में मशीनों में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं, फिर भी सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा और मशीनों के उचित रखरखाव में कमी नजर आ रही है। कोयला उत्पादन के दबाव में अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जो अंततः इस तरह के कुसमुंडा खदान हादसा (Kusmunda Mine Accident) का कारण बनती है।


