बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन कई बार देखा गया है, लेकिन इस बार जो फैसला सामने आया, उसने सबको हैरान कर दिया। नई NDA सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का निर्देश दिया है। लगभग दो दशकों से यह जगह लालू परिवार का राजनीतिक और सामाजिक केंद्र रही थी, लेकिन (Lalu Residence Eviction) से बनी यह स्थिति अब एक बिल्कुल नया अध्याय खोल चुकी है।
20 साल की निरंतर गतिविधियों के बाद इस पते का खाली होना सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है।
10 सर्कुलर रोड—सिर्फ बंगला नहीं, बिहार की राजनीति का धड़कता मंच
बिहार की राजनीति में 10 सर्कुलर रोड हमेशा एक रणनीतिक ठिकाने के रूप में देखा गया। यहां से लालू परिवार ने चुनावी रणनीतियां तय कीं, कई बड़े फैसले लिए गए और जनता से संपर्क का केंद्र भी यही रहा।
नीतीश कुमार के सत्ता समीकरण कई बार बदले, पर इस बंगले पर कभी कोई खतरा महसूस नहीं हुआ।
लेकिन इस बार सरकार गठन के तुरंत बाद आया यह सख्त आदेश यह दर्शाता है कि (Political eviction) अब सिर्फ कागजों पर दर्ज प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता के नए आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुका है।
तेजस्वी की पुरानी लड़ाई, नया मोड़—कोर्ट पहले भी दे चुका है झटका
तेजस्वी यादव का बंगले से जुड़ा विवाद कोई नया नहीं है। 2015 में उन्हें 5 देशरत्न मार्ग का आवास मिला, जिसे स्थायी डिप्टी सीएम आवास के रूप में तैयार किया गया था। 2017 में सत्ता बदलने के बाद वही बंगला छोड़ने का आदेश मिला और मामला कोर्ट तक पहुंचा।
अदालत ने उस समय साफ कर दिया था कि पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व डिप्टी सीएम को सरकारी आवास व अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिलेंगी।
आज जब (Lalu Residence Eviction) का नया फैसला सामने आया, तो यह मामला एक लंबी राजनीतिक कथा का विस्तार जैसा लगता है।
भावनाओं का उफान—लालू परिवार की नाराजगी खुलकर सामने आई
बंगला खाली करने के आदेश के बाद लालू परिवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेजप्रताप यादव ने कहा कि “भैयारी वाले रिश्ते” पर यह सरकार खुद ही विराम लगा रही है। उनके अनुसार, यह बंगला सिर्फ ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं था, बल्कि 28 वर्षों की भावनाओं, संघर्ष और राजनीतिक संवाद का प्रतीक था।
रोहिणी आचार्या ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक दबाव और बदलते चुनावी गणित से जोड़ा।
स्पष्ट है कि (NDA vs RJD conflict) आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है।
सरकार का रुख—नियमों की आड़ या सत्ता का नया संकेत?
सरकारी सूत्रों का दावा है कि आवास आवंटन नियमों के तहत यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
लेकिन सियासी विश्लेषकों का कहना है कि निर्णय का समय, उसकी तेजी और आदेश की कठोरता इस बात की ओर इशारा करती है कि बिहार में सत्ता का केंद्र अब नई कसौटियों पर चल रहा है।
10 सर्कुलर रोड का खाली होना महज़ एक पता बदलना नहीं—यह आने वाले महीनों में (Lalu Residence Eviction) के राजनीतिक प्रभाव को और गहरा दिखाएगा।




