सीजी भास्कर, 1 जुलाई। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा वित्तीय आवंटन जारी किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि (Mahapaur Adhyaksh Parshad Nidhi) के तहत कुल 104 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपये जारी किए हैं। इस राशि से स्थानीय निकायों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और विभिन्न मूलभूत विकास कार्यों को गति मिलेगी।
अरुण साव ने दिए पारदर्शी उपयोग के निर्देश
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की स्वीकृति के बाद विभाग ने महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि (Mahapaur Adhyaksh Parshad Nidhi) की राशि संबंधित नगरीय निकायों को जारी कर दी है। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए हैं कि निधि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए, ताकि शहरों में चल रही विकास योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक समय पर पहुंच सके।
पहली किस्त में जारी हुए 31.16 करोड़ रुपये
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि (Mahapaur Adhyaksh Parshad Nidhi) के अंतर्गत महापौर निधि एवं अध्यक्ष निधि की 50-50 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में 31 करोड़ 16 लाख 25 हजार रुपये जारी किए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के पार्षदों के लिए 73 करोड़ 38 लाख रुपये की पार्षद निधि भी स्वीकृत की गई है।
नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों को मिला आवंटन
विभाग ने 14 नगर निगमों को महापौर निधि के तहत 10 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये, 57 नगर पालिकाओं को अध्यक्ष निधि के लिए 11 करोड़ 6 लाख 25 हजार रुपये तथा 121 नगर पंचायतों को अध्यक्ष निधि के रूप में 9 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये जारी किए हैं।
वहीं महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि (Mahapaur Adhyaksh Parshad Nidhi) के तहत पार्षद निधि की प्रथम किस्त के रूप में नगर निगमों को 21 करोड़ 84 लाख रुपये, नगर पालिकाओं को 24 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये और नगर पंचायतों को 27 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
शहरों में बढ़ेंगे आधारभूत विकास कार्य
सरकार का कहना है कि महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि (Mahapaur Adhyaksh Parshad Nidhi) के माध्यम से सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य स्थानीय जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। इससे नगरीय निकायों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा।



