सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनाव (Maharashtra Municipal Election 2026) को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। इस बीच महायुति सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच गठबंधन में फूट खुलकर सामने आ गई है। दोनों दलों ने छत्रपति संभाजीनगर और पुणे महानगरपालिका चुनावों में अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चली लंबी बातचीत विफल हो गई, जिसके बाद गठबंधन टूटने की स्थिति बन गई। इसके बाद बीजेपी और शिवसेना नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
छत्रपति संभाजीनगर में गठबंधन टूटने का आरोप
छत्रपति संभाजीनगर से शिवसेना विधायक एवं मंत्री संजय शिरसाट ने बीजेपी पर गठबंधन तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में अपनी बढ़ती ताकत के कारण बीजेपी ने ‘अहंकार’ में आकर गठबंधन समाप्त किया। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना लगातार महानगरपालिका चुनाव में गठबंधन बनाए रखने की पक्षधर रही और मतदाताओं की भी यही इच्छा थी।
शिरसाट ने कहा, “हमने अंतिम समय तक गठबंधन बचाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ स्थानीय बीजेपी नेताओं ने जानबूझकर इसे तोड़ दिया। हमें इस फैसले का दुख है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विवादित सीटों पर हुई बातचीत के बावजूद, इस मुद्दे को दोबारा उछालकर स्थिति बिगाड़ी गई।
शिवसेना का आरोप: अंधेरे में रखकर चली बातचीत
शिवसेना मंत्री ने दावा किया कि बीजेपी सीट बंटवारे को लेकर शिवसेना को ‘अंधेरे में रखकर’ बातचीत करती रही, जबकि समानांतर रूप से अपने उम्मीदवारों की तैयारी भी करती रही। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने अब अपने सभी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने के निर्देश दे दिए हैं और संभावित प्रशासनिक बाधाओं को लेकर आशंका भी जताई है।
बीजेपी ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, शिवसेना के आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी मंत्री अतुल सावे ने कहा कि गठबंधन टूटने के लिए शिवसेना स्वयं जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना नेताओं ने बार-बार सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख बदला और उन सीटों की मांग की, जहां से बीजेपी के पार्षद लगातार जीतते आ रहे हैं।
अतुल सावे ने कहा, “शिवसेना के अहंकार के कारण ही गठबंधन टूटा। बीजेपी आज भी गठबंधन चाहती है, लेकिन नामांकन की समयसीमा समाप्त होने में कुछ ही घंटे बचे हैं।” बीजेपी नेता और राज्यसभा सदस्य भगवत कराड ने भी कहा कि पार्टी ने शिवसेना को अपेक्षा से अधिक सीटें देने की उदारता दिखाई थी, लेकिन उसकी मांगें लगातार बढ़ती चली गईं।
पुणे में भी अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला
इसी तरह पुणे महानगरपालिका में भी सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। गहन बातचीत के बावजूद शिवसेना को अपेक्षित सीटें नहीं मिलने के बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। शिवसेना नेता नाना भानगिरे ने कहा कि बीजेपी द्वारा केवल 16 सीटें ऑफर किए जाने के बाद पार्टी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि शिवसेना पुणे महानगरपालिका में कुल 165 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और सभी उम्मीदवारों को ‘एबी’ फॉर्म जारी किए जाएंगे।
महायुति की एकजुटता पर सवाल
छत्रपति संभाजीनगर और पुणे जैसे बड़े नगर निगमों में गठबंधन टूटने से नगर निकाय चुनाव (Maharashtra Municipal Election 2026) से पहले महायुति की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर अन्य नगर निगमों और आगामी विधानसभा समीकरणों पर भी पड़ सकता है।




