सीजी भास्कर, 31 जनवरी | रायपुर। राजधानी के सबसे चर्चित और पसंदीदा सार्वजनिक स्थल तेलीबांधा तालाब, जिसे मरीन ड्राइव के नाम से जाना जाता है, वहां अब पार्किंग शुल्क वसूले जाने का फैसला विवाद की वजह बन गया है। Marine Drive Parking Fee लागू होते ही मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने वाले लोगों में नाराजगी साफ नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि जिस पाथवे को पैदल चलने के लिए बनाया गया था, उसे पार्किंग एरिया में बदला जा रहा है।
पाथवे को पार्किंग जोन घोषित करने पर सवाल
नगर निगम द्वारा तेलीबांधा तालाब के पाथवे क्षेत्र को पार्किंग स्थल घोषित किया गया है। नए नियमों के तहत चार पहिया वाहनों के लिए 4 घंटे का शुल्क 20 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 12 घंटे का शुल्क 10 रुपये तय किया गया है। Marine Drive Parking Fee के तहत शुल्क वसूली की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और तालाब परिसर में आपत्ति जताते हुए बैनर भी लगाए गए हैं।
वॉकर्स बोले—फुटपाथ पर पार्किंग कैसे जायज?
मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने वाले नागरिकों का कहना है कि फुटपाथ का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित चलने की जगह देना होता है, न कि वाहनों की पार्किंग। स्थानीय नागरिक श्यामलाल साहू, विनीत और अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि क्या अब पैदल घूमने वालों से भी अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क वसूला जाएगा। उनका कहना है कि पहले भी इसी तरह का निर्णय लिया गया था, जिसे विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था।
अधिकारियों तक नहीं पहुंची पूरी जानकारी
जब इस मुद्दे पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें फिलहाल इस तरह के किसी निर्णय की विस्तृत जानकारी नहीं है। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर किस स्तर पर Marine Drive Parking Fee को लागू करने का फैसला लिया गया और इसकी जानकारी आम लोगों तक स्पष्ट रूप से क्यों नहीं पहुंचाई गई।
पहले भी उठ चुका है ऐसा विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब तेलीबांधा तालाब में पार्किंग शुल्क को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी एक बार यहां घूमने आने वाले लोगों से पार्किंग चार्ज वसूलने का फैसला लिया गया था, लेकिन जनता के विरोध के बाद उसे वापस लेना पड़ा था। एक बार फिर वही स्थिति बनती दिख रही है, जहां Marine Drive Parking Fee को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
जनता की मांग—फैसले पर हो पुनर्विचार
स्थानीय लोगों और नियमित वॉकर्स की मांग है कि नगर निगम इस फैसले पर दोबारा विचार करे। उनका कहना है कि मरीन ड्राइव जैसे सार्वजनिक स्थान लोगों की सेहत और सुकून से जुड़े होते हैं, न कि राजस्व वसूली का जरिया। अब देखना यह होगा कि बढ़ते विरोध के बीच Marine Drive Parking Fee पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है।


