सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (Marwahi Wildlife Update) जिले से वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष और कुदरत के कड़े कहर की दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने अब जंगलों में भी अपना कूटनीतिक आतंक मचाना शुरू कर दिया है। मरवाही वनमंडल के पिपरिया गांव से लगे घने जंगल में हीट स्ट्रोक (लू) की चपेट में आने से एक 5 साल की मादा भालू की दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद घटना के बीच वनमंडल में एक और बड़ा सस्पेंस और खतरा तब पैदा हो गया, जब मध्य प्रदेश की सीमा लांघकर 4 भारी-भरकम हाथियों का एक दल अचानक मरवाही के गांवों में दाखिल हो गया और कड़ाई से तबाही मचानी शुरू कर दी।
दरअसल, पहली घटना (Marwahi Wildlife Update)मरवाही रेंज के पिपरिया गांव के पास की है, जहां ग्रामीणों को जंगल के भीतर एक मादा भालू का शव पड़ा हुआ मिला। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। मरवाही वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) ग्रीष्मी चांद ने मामले की कड़ाई से पुष्टि करते हुए बताया कि भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण भालू ‘हीट स्ट्रोक’ का शिकार हो गई थी। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) की मौजूदगी में शव का पंचनामा तैयार कर कड़े प्रोटोकॉल के तहत मृत भालू का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस घटना के बाद वन विभाग जंगली जानवरों के लिए पानी के कड़े इंतजाम करने के दावे कर रहा है।
इसी बीच, मरवाही वनमंडल के सिवनी वृत्त में हाथियों की आमद से एक नया कूटनीतिक सस्पेंस और दहशत का माहौल बन गया है। मध्य प्रदेश की सरहद से आए 4 हाथियों का यह आक्रामक दल वर्तमान में घुसरिया बीट के कक्ष क्रमांक 2051 में कड़ाई से डेरा डाले हुए है। हालांकि, राहत की बात यह है कि हाथियों ने अब तक किसी मकान को नहीं ढहाया है और न ही कोई जनहानि की है, लेकिन उन्होंने चिचगोहना, मजीतटोला, घुसरिया और कुम्हारी के कुल 12 लाचार किसानों की तैयार फसलों को पूरी तरह रौंदकर नष्ट कर दिया है। चारों गांवों से फसल हानि के 3-3 गंभीर मामले सामने आए हैं।
वन विभाग के वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों (Marwahi Wildlife Update) के इस दल के अगले कुछ घंटों में मरवाही परिसर, सचराटोला परिसर या पंडरी परिसर की ओर कड़ाई से बढ़ने की पूरी संभावना बनी हुई है। इस बड़े खतरे को देखते हुए वन परिक्षेत्र के कर्मचारी हाथियों की पल-पल की लोकेशन ट्रेस कर रहे हैं। वन अमले ने सीमावर्ती गांवों में कड़े तेवर दिखाते हुए मुनादी (लाउडस्पीकर से घोषणा) करानी शुरू कर दी है और ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी हाल में सूनी शाम या रात के वक्त जंगल की तरफ न जाएं और हाथियों से एक सुरक्षित कूटनीतिक दूरी बनाए रखें, ताकि किसी भी अप्रिय और जानलेवा हादसे को कड़ाई से टाला जा सके।




